

कोलकाता : भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कोलकाता के सत्यजीत राय सभागार में देश की पहली ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग कलाकार गौहर जान की स्मृति में डांस ड्रामा ‘तवायफनामा’ प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता की संस्था सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन तथा गुरुग्राम की द परफॉर्मिंग आर्ट ट्राइब ने किया।
देश में पहली ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग 11 नवंबर 1902 को कोलकाता में हुई थी, जिसमें गौहर जान की आवाज रिकॉर्ड की गई थी। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में हिंदी के वरिष्ठ कवि-पत्रकार अरविंद कुमार उर्फ विमल कुमार की पुस्तक ‘तवायफनामा’ पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई।
इसमें इतिहास की 33 भूली-बिसरी गायिकाओं के जीवन, संघर्ष और संगीत योगदान को मंच पर उकेरा गया। सोमा बनर्जी के निर्देशन में करीब एक घंटे के इस डांस ड्रामा में 12 महिला कलाकारों ने भाग लिया।
गुंजन अजहर ने गौहर जान की भूमिका निभाई, जबकि निलोपा मोइत्रा ने नृत्य प्रस्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बेगम अख्तर, रसूलन बाई, जद्दन बाई, विद्याधरी और असगरी बाई जैसी कलाकारों के योगदान को भी नाटिका में प्रस्तुत किया गया।
आयोजकों संजय जायसवाल और अरविंद कुमार के अनुसार, इन गायिकाओं ने हिंदुस्तानी संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलनों में भी योगदान दिया, लेकिन इतिहास में उन्हें अपेक्षित स्थान नहीं मिला।
कार्यक्रम में शंभुनाथ, यतीश कुमार, गीता दूबे और अल्पना नायक ने विचार रखे। इस अवसर पर ‘स्त्री लेखा’ का गौहर जान विशेषांक और भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125 वर्ष पर स्मारिका का भी विमोचन किया गया। आयोजकों ने कहा कि नृत्य और रंगमंच के माध्यम से इन विस्मृत महिला कलाकारों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।