

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार राज्य की चार जीआई टैग प्राप्त सुगंधित चावल की किस्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए दो बड़े चावल प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने और इन किस्मों की खेती का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
इस पहल का उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाना और बंगाल के पारंपरिक चावल की पहचान को वैश्विक बाजार में मजबूत करना है।
चार खास किस्मों पर रहेगा जोर
राज्य सरकार की योजना में गोविंदभोग, तुलाइपांजी, कालोनुनिया और राधुनिपागल चावल शामिल हैं। इन चारों किस्मों को उनकी विशिष्ट पहचान और सुगंध के लिए जाना जाता है। सरकार इनके उत्पादन, प्रसंस्करण और व्यावसायिक बिक्री की व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है, ताकि घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी इनकी मांग बढ़ाई जा सके।
पूर्व बर्धमान और उत्तर दिनाजपुर में बनेंगे केंद्र
योजना के पहले चरण में पूर्व बर्धमान और उत्तर दिनाजपुर में दो बड़े चावल प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों में चावल की प्रोसेसिंग और उसे बड़े बाजारों में बिक्री तथा निर्यात के लिए तैयार करने की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
कृषि मंत्री धूध कुमार मंडल ने दिल्ली में प्रमुख राइस मिल मालिकों और बासमती चावल निर्यात कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस योजना पर चर्चा की। बैठक का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने, निर्यात की संभावनाएं तलाशने और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने के उपायों पर विचार करना था।
खेती का रकबा बढ़ाने और अनुसंधान पर भी जोर
राज्य सरकार सुगंधित चावल की पौष्टिकता बढ़ाने और उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम करने के लिए आनुवंशिक अनुसंधान की संभावनाएं भी तलाश रही है। इसके साथ अधिक उपज देने वाले बीज विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026-27 में इन सुगंधित चावल की किस्मों की खेती का रकबा 15,148 हेक्टेयर और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि बेहतर प्रसंस्करण सुविधाओं, उत्पादन में वृद्धि और निर्यात के नए अवसरों से बंगाल के किसानों को लाभ मिलेगा।