

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। राज्य में विवाह और पारिवारिक मामलों से जुड़े कम से कम 13 अलग-अलग कानूनों को खत्म कर उनकी जगह एक व्यापक कानून लाने की तैयारी है। प्रस्तावित UCC का मुख्य जोर लैंगिक समानता और सभी धर्मों के लिए समान कानूनी व्यवस्था पर रहेगा।
UCC के तहत विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार, गोद लेने और अभिभावकत्व जैसे मामलों में सभी समुदायों के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है। साथ ही, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं, पहनावे तथा पारंपरिक रस्मों में हस्तक्षेप नहीं करने का प्रस्ताव है।
किन कानूनों की जगह लेगा नया UCC?
जानकारी के अनुसार, जिन कानूनों को प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है, उनमें हिंदू मैरिज एक्ट 1955, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872, पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 1936, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937 सहित कुल 13 कानून शामिल हैं।
इनमें विवाह, तलाक और अलग-अलग समुदायों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों के प्रावधान मौजूद हैं। प्रस्तावित UCC के तहत हर विवाह का निर्धारित समय सीमा के भीतर राज्य के अधिकृत अधिकारियों के पास पंजीकरण अनिवार्य किए जाने की बात सामने आई है।
कोर्ट के बाहर तलाक की व्यवस्था समाप्त करने और पति-पत्नी को गुजारा भत्ता तथा तलाक के आधार पर समान अधिकार देने का भी प्रस्ताव है।
लिव-इन रिलेशनशिप से विरासत तक बदलेंगे नियम
प्रस्तावित कानून में बहुविवाह और बाल विवाह पर रोक लगाने की बात कही गई है। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए भी पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इससे ऐसे संबंधों से जुड़े बच्चों और दोनों पार्टनरों को कानूनी सुरक्षा देने का दावा किया गया है।
उत्तराधिकार के मामले में बेटे और बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रस्ताव है। गोद लेने और वसीयत से जुड़े नियमों को भी धर्म और लिंग से निरपेक्ष बनाने की योजना है। UCC तैयार करने वाली समिति की पहली बैठक दिल्ली में होने वाली है, जिसमें आगे की रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी।