

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी के सचिव जयदीप पटवा ने शिक्षा क्षेत्र के प्रति सरकार के दृष्टिकोण का संतुलित मूल्यांकन प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के लिए ₹1.25 लाख करोड़ के आवंटन का स्वागत करते हुए इसे शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाने वाला सकारात्मक कदम बताया। श्री पटवा ने डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार पर दिए गए विशेष जोर की सराहना की।
उन्होंने कहा कि स्किलिंग के लिए नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, अटल टिंकरिंग लैब्स तथा शिक्षा के लिए प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर एजूकेशन जैसी पहलें अकादमिक शिक्षा को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ने और छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता भी व्यक्त की कि कुल बजटीय आवंटन अब भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में सुझाए गए शिक्षा पर जीडीपी के 6 प्रतिशत खर्च के लक्ष्य से कम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में तत्काल और अधिक निवेश की आवश्यकता है।
शिक्षा को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए श्री पटवा ने सरकार से आग्रह किया कि शैक्षणिक सेवाओं पर जीएसटी के युक्तिकरण पर विचार किया जाए, ताकि परिवारों और शैक्षणिक संस्थानों पर वित्तीय बोझ कम हो सके। साथ ही, उन्होंने हाशिए पर रह रहे समुदायों के लिए समर्थन को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा कि निरंतर वित्तीय सहयोग, समावेशी नीतियां और दीर्घकालिक दृष्टि ही भारत के युवाओं के लिए एक वास्तव में समान, कुशल और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की कुंजी हैं।
एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी के बारे में :
एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी, न्यूटाउन, कोलकाता स्थित एक सह-शिक्षा संस्थान है, जो सीबीएसई और कैम्ब्रिज (आईजीसीएसई) पाठ्यक्रम प्रदान करता है। अनुभवात्मक और गतिविधि-आधारित शिक्षण पर विशेष जोर के साथ, यह अकादमी शिक्षा, प्रौद्योगिकी, खेल और कला का समन्वय करती है, जिससे छात्रों में समालोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और नेतृत्व कौशल विकसित हों और वे एक गतिशील वैश्विक परिवेश में सफलता के लिए तैयार हो सकें।