

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि ड्यूटी के दौरान उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की FIR बिना प्रारंभिक जांच के दर्ज नहीं की जाएगी। आयोग ने कहा है कि यदि सीएपीएफ अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए कोई कार्रवाई करता है, तो उसे “बोनाफाइड एक्शन” माना जाएगा और सीधे एफआईआर दर्ज करने से पहले जांच अनिवार्य होगी। अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी निर्देश में सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। आयोग का उद्देश्य चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों को निर्भीक होकर काम करने का माहौल देना है, ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जा सके।
24 घंटे सक्रिय रहेंगे फ्लाइंग स्क्वाड और एसएसटी
इसके साथ ही आयोग ने चुनाव तैयारियों को लेकर कई अन्य अहम दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। लाइसेंसी हथियारों को 27 मार्च 2026 तक हर हाल में जमा कराने, प्रत्येक जिले में कंपोजिट कंट्रोल रूम स्थापित करने और सभी विधानसभा क्षेत्रों में 24 घंटे फ्लाइंग स्क्वॉड एवं स्टैटिक सर्विलांस टीम को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। सीएपीएफ के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए क्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करने, संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ाने और विश्वास निर्माण गतिविधियों को तेज करने को कहा गया है। नाकों पर चेकिंग के लिए स्पष्ट एसओपी लागू करने और उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया गया है।
आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि सीएपीएफ के साथ तैनात पुलिसकर्मी बॉडी कैमरा और सीसीटीवी का उपयोग करें, ताकि किसी भी प्रकार के विवाद या आरोप से बचा जा सके। साथ ही हर तैनाती स्थल पर मजिस्ट्रेट और पुलिस की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। निर्वाचन आयोग ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाए रखते हुए इन निर्देशों का तत्काल पालन करने को कहा है और इसे “इलेक्शन अर्जेंट” श्रेणी में रखा है।