थाने में 'नो जजमेंट, नो कमेंट्स': महिलाओं की शिकायतों पर कोलकाता पुलिस का नया मॉडल

वूमेन हेल्प डेस्क के लिए लालबाजार ने जारी किया दिशा-निर्देश
फाइल फोटो
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दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय को बढ़ावा देने की दिशा में कोलकाता पुलिस ने एक बेहद संवेदनशील और बड़ा कदम उठाया है। थानों में आने वाली पीड़ित महिलाओं को एक सुरक्षित और गरिमामय माहौल देने के लिए 'विमेन हेल्प डेस्क' के संचालन हेतु नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन नए नियमों का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय की उम्मीद में थाने आई किसी भी महिला को किसी भी तरह के पूर्वाग्रह, डर या असुविधा का सामना न करना पड़े।

पहनावे और चरित्र पर टिप्पणी पूरी तरह बैन

महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को अधिक पीड़िता-केंद्रित बनाने की दिशा में उठाए गए इस कदम के तहत हेल्प डेस्क पर तैनात पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे शिकायतकर्ता के चरित्र, पहनावे, जीवनशैली या निजी फैसलों पर कोई टिप्पणी या सवाल न उठाएं। किसी भी प्रकार की असंवेदनशील टिप्पणी, मजाक, इशारा या ऐसा व्यवहार जिससे पीड़िता असहज महसूस करे, पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता से ऊंची आवाज में बात करना, उसे डराना-धमकाना या उसके बारे में पहले से कोई धारणा बनाना स्वीकार्य नहीं होगा। पुलिसकर्मियों को हर स्थिति में शांत, सम्मानजनक और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

लीक नहीं होगी कोई भी जानकारी

पीड़िता की गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शिकायत दर्ज कराने के दौरान कोई अनधिकृत व्यक्ति मौजूद न रहे। मामले से जुड़ी जानकारी किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा नहीं की जाएगी और सार्वजनिक स्थानों, फोन या सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा करना भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

अधिकार क्षेत्र का बहाना खत्म, अब 'Zero FIR' से मिलेगी राहत

कोलकाता पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी महिला की शिकायत अधिकार क्षेत्र का हवाला देकर लेने से इनकार नहीं किया जा सकता। जीरो एफआईआर के प्रावधान के तहत किसी भी थाने में शिकायत दर्ज की जा सकती है, जिसे बाद में संबंधित थाने को भेजा जाएगा। शिकायत दर्ज करने में अनावश्यक देरी करने और गंभीर या संज्ञेय अपराधों में समझौते के लिए दबाव बनाने पर भी रोक लगाई गई है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन दिशा-निर्देशों से महिलाओं का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा तथा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और भरोसेमंद बनेगी।

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