

आरोपी ने खुद और मां-पत्नी के खातों में ट्रांसफर की रकम
दीपक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (ईस्ट डिविजन) कार्यालय में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। कार्यालय में तैनात एक सरकारी कर्मचारी ने सिस्टम में हेरफेर कर और फर्जी वेंडर बिल बनाकर राज्य सरकार के खजाने से कुल 51.01 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का गबन कर लिया। इस मामले का खुलासा एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है। जांच रिपोर्ट आने के बाद एसीपी ने शुक्रवार को डिप्टी कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपी। इसके बाद आनंदपुर थाने में अभियुक्त के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का विशेष मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने अभियुक्त पुलाकेंदु घोष को गिरफ्तार कर लिया। अभियुक्त को अदालत में पेश करने पर उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। वह मूल रूप से कोलकाता पुलिस विभाग से प्रतिनियुक्ति पर तैनात था।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार कोलकाता पुलिस के ईस्ट डिविजन के डीआरओ ऑफिस में स्टेशनरी आईटम मंगाने और उसके वेंडर का पेमेंट भुगतान करने का दायित्व पुलाकेंदु घोष को दिया गया था। इस पूरे घोटाले की भनक तब लगी जब कुछ वास्तविक सप्लायर्स ने अपने बकाए का भुगतान नहीं मिलने की शिकायतें उच्च अधिकारियों से कीं। इसके बाद जॉइंट सीपी (हेडक्वार्टर्स) के आदेश पर 11 जून 2026 को एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई। इस समिति ने 30 जून 2026 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें घोटाले की परतें खुलीं।
112 फर्जी बिल के जरिए लाखों रुपये के गबन को दिया अंजाम
जांच के दौरान यह पाया गया कि बिल और सप्लायर्स के भुगतान की जिम्मेदारी मिलने का फायदा उठाकर आरोपी ने मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली के डेटाबेस में अवैध रूप से हेरफेर किया। उसने असली वेंडरों और ठेकेदारों के बैंक खातों को सिस्टम में ब्लॉक या इनएक्टिव कर दिया और उनकी जगह चालाकी से अपने, अपनी मां और अपनी पत्नी के बैंक खातों के विवरण दर्ज कर दिए। इसके बाद फर्जी वाउचर और रबर स्टैंप तैयार कर कुल 112 जाली बिल पास कराए गए और सारा पैसा सीधे परिवार के खातों में ट्रांसफर कर लिया गया।
चार सालों से चल रहा था खेल
जांच के अनुसार, वर्ष 2022-23 से लेकर 2025-26 के बीच इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच में पता चला कि पुलाकेन्दु घोष ने अपने बैंक खाते में कुल 88 फर्जी बिलों के जरिए 37.81 रुपये लिये थे। अभियुक्त ने अपनी मां के बैंक अकाउंट में 24 फर्जी बिलों के माध्यम से 10.49 लाख रुपये ट्रांसफर कराये। अभियुक्त ने अपनी पत्नी के एक अन्य बैंक खाते में 51 हजार रुपये की राशि दो फर्जी बिलों के जरिए भेजी गई। जांच कमेटी के सामने पेश होने पर आरोपी पुलाकेन्दु घोष ने लिखित रूप से अपनी इस करतूत और धोखाधड़ी को स्वीकार कर लिया है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि विभाग में ट्रेजरर का पद खाली होने और उच्च अधिकारियों द्वारा प्रभावी पर्यवेक्षण व निगरानी की भारी कमी के कारण यह घोटाला इतने लंबे समय तक बिना पकड़े चलता रहा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।