साहित्य-संस्कृति जगत के 'शुद्धीकरण' को लेकर सीएम से गुहार

ममता के शासनकाल की सांस्कृतिक व्यवस्था पर सवाल
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कोलकाता : पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासनकाल में बंगाल के साहित्य, सिनेमा, रंगमंच और संस्कृति जगत में कथित भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शनिवार को प्रेस क्लब में 'साहित्य और संस्कृति जगत में स्वच्छता लौटाने' के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों, कवियों, लेखकों, गायकों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

'एसोसिएशन फॉर बंगाल लिटरेचर एंड कल्चर', 'साहित्य संस्कृति सहयोगी-शिक्षार्थी संघ' और 'बांग्लार मन' की ओर से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नाम 12 अलग-अलग लिखित शिकायतें भाजपा विधायक रुद्रनील घोष को सौंपी गईं। सम्मेलन में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के दौरान कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों और समूहों ने सांस्कृतिक संस्थानों पर वर्चस्व कायम कर लिया था।

पूर्व मंत्री ब्रात्य बसु, कवि सुबोध सरकार, पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड और निर्देशक सौरभ पलोधी समेत कई नामों का उल्लेख करते हुए साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पक्षपात, अवसरों के असमान वितरण और नैतिक पतन के आरोप लगाए गए। साथ ही बंगला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और अन्य संस्थानों में पद के दुरुपयोग और शोषण जैसे मुद्दे भी उठाए गए।

वक्ताओं ने इन मामलों की स्वतंत्र जांच और सांस्कृतिक संस्थानों के पुनर्गठन की मांग की। भाजपा विधायक रुद्रनील घोष ने कहा कि वह केवल एक संदेशवाहक हैं और सभी शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई सरकार को समय दीजिए, न्याय अवश्य होगा।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह सम्मेलन बंगाल की सांस्कृतिक राजनीति में एक नए संघर्ष की शुरुआत का संकेत है।

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