

कोलकाता: बैंक खाता किराए पर देना या आसान लोन के लालच में बैंक विवरण साझा करना लोगों को भारी पड़ रहा है। ताज़ा मामलों में दक्षिण कोलकाता की एक महिला और एक युवक, दोनों ही ऐसे साइबर अपराध का शिकार बने हैं, जहाँ उनके नाम पर फर्जी दस्तावेज़ बनाकर लाखों रुपये के लोन लिए गए, और फिर वही लोग आरोपियों के कटघरे में खड़े हो गए।
महिला के नाम पर फर्जी लोन, फिर हुई गिरफ्तार
टॉलीगंज निवासी रीता वैद्य सेनगुप्ता को कुछ समय पहले एक फोन आया। फोन पर कहा गया कि उन्हें आसानी से लोन दिलवाया जा सकता है। उस वक्त महिला को पैसों की ज़रूरत थी, इसलिए उन्होंने अपनी बैंक जानकारी साझा कर दी। यहीं से ठगी की पटकथा शुरू हुई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जालसाज़ों ने रीता देवी के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए, जिसमें उन्हें बीएसएनएल कर्मचारी बताया गया। फर्जी वेतन पर्ची और अन्य दस्तावेजों के आधार पर एक लोन देने वाली कंपनी से 5 लाख रुपये का ऋण लिया गया। रीता देवी के अनुसार, उन्हें न तो लोन की पूरी जानकारी थी और न ही पूरी रकम मिली। उनके खाते में बहुत ही कम पैसा आया, लेकिन लोन देने वाली कंपनी के रिकॉर्ड में उनके नाम पर 5 लाख रुपये का बकाया दर्ज था। जब समय पर ईएमआई जमा नहीं हुई, तो कंपनी ने कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच करते हुए लालबाजार डिटेक्टिव ब्रांच की टीम ने रीता देवी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पूरा ठगी का नेटवर्क सामने आया, लेकिन मुख्य मास्टरमाइंड अभी भी फरार है।
युवक के खाते का इस्तेमाल, चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई
इसी तरह का मामला सामने आया बंसद्रौणी निवासी इमरान अंसारी के साथ। आरोप है कि इमरान के बैंक खाते को भी किराए पर लेकर जालसाज़ों ने फर्जी तरीके से 3.90 लाख रुपये का लोन निकाला। यह मामला चंडीगढ़ में दर्ज हुआ, जिसके बाद वहां की पुलिस ने कोलकाता पुलिस के सहयोग से इमरान के घर पर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर लिया। इमरान का दावा है कि उसे इस पूरी साजिश की कोई जानकारी नहीं थी।
मास्टरमाइंड की तलाश, पुलिस की अपील
इन दोनों मामलों में पुलिस को संदेह है कि एक ही नेटवर्क अलग-अलग लोगों को आसान लोन या कमाई का झांसा देकर उनके बैंक खाते किराए पर ले रहा है, और फिर उनके नाम पर लोन लेकर पैसे निकालकर फरार हो जा रहा है। लालबाजार खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार हो रही इन घटनाओं से चिंतित हैं। पुलिस की ओर से नागरिकों को सावधान रहने की अपील की गई है। उन्होंने साफ कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता किराए पर न दें और फर्जी कॉल या लोन के झांसे से दूर रहें।
पुलिस का मानना है कि यह एक सुनियोजित साइबर अपराध का नेटवर्क है, जिसका सरगना अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। उसकी तलाश में तथ्यों को जोड़ा जा रहा है, और जल्द ही अधिक गिरफ्तारी की संभावना है।