शिक्षकों को स्कूल के बाद जनगणना ड्यूटी का आदेश वापस

हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने दी जानकारी
Kolkata
स्कूल के बाद जनगणना ड्यूटी नहीं करेंगे शिक्षक
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूल शिक्षकों को स्कूल समय के बाद और सप्ताहांत में जनगणना संबंधी कार्य कराने के लिए जारी आदेश वापस ले लिया है। राज्य सरकार ने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट को इसकी जानकारी दी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग और प्रशासन के बीच समन्वय तथा छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने को लेकर सवाल उठ रहे थे।

3 अगस्त की अधिसूचना वापस

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों को स्कूल के बाद और सप्ताहांत में ड्यूटी देने संबंधी 3 अगस्त की अधिसूचना वापस ले ली गई है।

एक दिन पहले हाईकोर्ट ने शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी के समय को लेकर राज्य और केंद्र के बीच समन्वय की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जनगणना कार्य और शिक्षकों की नियमित शैक्षणिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाया जाना जरूरी है।

स्कूल शिक्षा निदेशालय ने कहा कि जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों की तैनाती इस तरह की जानी चाहिए, जिससे स्कूलों में पढ़ाई और छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर न पड़े।

इसके लिए जिला प्राथमिक स्कूल परिषदों, केपीएससी और सिलीगुड़ी पीएससी के अध्यक्षों एवं सचिवों तथा जिला विद्यालय निरीक्षकों को जनगणना अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

एक शिक्षक को महीने में 150 घरों का सर्वे

राज्य सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 15ए कर्मचारियों के नियमित करियर, नौकरी की स्थिति या पदोन्नति पर जनगणना कार्य के प्रतिकूल प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करती है।

सरकार के अनुसार, प्रत्येक गणनाकर्मी को एक महीने में करीब 150 घरों का दौरा करना है, यानी प्रतिदिन लगभग पांच परिसरों का सर्वे करना होगा। सरकार ने इसे बहुत अधिक कार्यभार नहीं बताया।

हालांकि, शिक्षकों और उनके संगठनों की ओर से स्कूल समय के बाद जनगणना ड्यूटी को लेकर आपत्ति जताई गई थी। उनका तर्क था कि अतिरिक्त जिम्मेदारी से शिक्षकों पर काम का दबाव बढ़ेगा और उनकी नियमित शैक्षणिक जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती हैं।

अधिसूचना वापस लिए जाने के बाद ये विवाद फिलहाल शांत होता दिख रहा है। वहीं हाईकोर्ट ने शिक्षकों को जनगणना कार्य सौंपने से संबंधित याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।

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