अवैध रूप से गिराई गई बिल्डिंग का निर्माण कराने का आदेश

हाई कोर्ट ने दिया 10 लाख मुआवजा देने का आदेश भी
अवैध रूप से गिराई गई बिल्डिंग का निर्माण कराने का आदेश
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : वैध रूप से बनाई गई एक बिल्डिंग को अवैध रूप से गिरा दिया गया। इस मामले में दायर पिटीशन पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी ने वेस्ट बंगाल हाईवे ऑथोरिटी को नए सिरे से बिल्डिंग का निर्माण कराए जाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मुआवजे के रूप में 10 लख रुपए देने का आदेश दिया है। इस निर्माण कार्य को दो साल के अंदर पूरा करना पड़ेगा।

एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जस्टिस चटर्जी ने आदेश दिया है कि इन दो वर्षों के दौरान पेटीशनर की रहने की वैकल्पिक व्यवस्था भी हाईवे अथॉरिटी को करनी पड़ेगी। कविता मन्ना ने यह पिटीशन दायर किया था। पेटीशनर ने वैशाली मौजा में ग्राम पंचायत से लेआउट पास कराने के बाद एक दो मंजिला बिल्डिंग का निर्माण कराया था। यही हाईवे पर कुछ अवैध निर्माण भी कराए गए थे। इन अवैध निर्माणों को गिराने के लिए नोटिस दी गई थी और पेटीशनर को भी नोटिस मिली थी। पेटीशनर ने हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी थी। डिवीजन बेंच ने अवैध निर्माण गिराए जाने का आदेश दिया था। हाईवे अथॉरिटी ने एक नंबर और दो नंबर प्लॉट पर कराए गए अवैध निर्माण के साथ ही एलआर प्लॉट पर कराए गए इस वैध निर्माण को भी गिरा दिया। डिवीजन बेंच ने पेटीशनर को उपयुक्त फोरम में मामला करने का आदेश दिया था। इसके तहत ही जस्टिस चटर्जी के कोर्ट में यह मामला दायर किया गया था।

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