

कोलकाता : बच्चों के बीच साइबर बुलिंग एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि लगभग हर तीन में से एक छात्र किसी न किसी रूप में साइबर बुलिंग का सामना कर रहा है।
सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म इसके प्रमुख माध्यम बनकर उभरे हैं, जहां बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों के अनुसार, साइबर बुलिंग केवल आपत्तिजनक संदेशों तक सीमित नहीं है।
ऑनलाइन ट्रोलिंग, अपमानजनक टिप्पणियां, अफवाहें फैलाना, फर्जी प्रोफाइल बनाकर परेशान करना तथा निजी तस्वीरों और जानकारियों का दुरुपयोग जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इनका बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे वे तनाव, चिंता, अवसाद और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
कई मामलों में इसका असर उनकी पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर भी दिखाई दे रहा है। शिक्षाविदों का मानना है कि साइबर बुलिंग की रोकथाम के लिए अभिभावकों और स्कूलों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने, उनसे खुलकर बातचीत करने और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के प्रति जागरूक करने की अपील की है।
वहीं, स्कूलों से भी डिजिटल सुरक्षा, साइबर शिष्टाचार और जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग को लेकर नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया है, ताकि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखा जा सके।