

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मेट्टा (दाना) फाउंडेशन और जागृति धाम सीनियर लिविंग ने 16 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस और बाल दिवस 2025 के उपलक्ष्य में Celebrating Life Across Generations नामक अंतरपीढ़ी कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम जागृति धाम – मर्लिन ग्रीन्स, इबिज़ा क्लब, डायमंड हार्बर रोड पर आयोजित हुआ, जिसमें वरिष्ठ नागरिक, टाइप 1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चे, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और कलाकार एक साथ जुड़े। इस आयोजन का उद्देश्य सीख, संवाद और साझा अनुभवों के माध्यम से जागरूकता फैलाना था।
आयोजकों के अनुसार, इस पहल का मकसद पीढ़ियों के बीच सार्थक संबंध स्थापित करना और मधुमेह व समग्र स्वास्थ्य के प्रति गहरी समझ विकसित करना था।
ट्रस्टी और संस्थापक रवीन्द्र चमरिया ने कहा, “जागृति धाम में हम मानते हैं कि जीवन की असली समृद्धि जुड़ाव में है — पीढ़ियों, अनुभवों और भावनाओं के बीच। यह पहल उसी सोच का सुंदर उदाहरण है, जो हमें याद दिलाती है कि करुणा और देखभाल की कोई उम्र नहीं होती।”
ट्रस्टी पुलक चमरिया ने कहा, “एक बच्चे और एक बुज़ुर्ग के बीच बिताया हर पल भावनात्मक रूप से बहुत अनमोल होता है। ऐसे कार्यक्रम सहानुभूति को मजबूत करते हैं और दोनों पीढ़ियों को एक-दूसरे से सीखने के लिए प्रेरित करते हैं।”
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. देबाशिष बसु का इंटरएक्टिव सत्र था।उनका प्रेरक व्याख्यान Insights that Inspire वृद्ध देखभाल, संतुलित जीवनशैली और वरिष्ठ नागरिकों व बच्चों में मधुमेह प्रबंधन के बदलते तरीकों पर केंद्रित था। प्रतिभागियों ने अपनी चिंताएँ और व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिससे डॉक्टरों, जागृति धाम के निवासियों और “लिटिल वॉरियर्स” — टाइप 1 डायबिटीज वाले बच्चों के परिवारों के बीच खुलकर बातचीत का अवसर मिला।