तृणमूल में लोकतंत्र नहीं बचा : ऋतब्रत

पार्टी में बढ़ी कलह, नेतृत्व पर तीखा हमला
ऋतब्रत बनर्जी
ऋतब्रत बनर्जीफाइल फोटो
Published on

कोलकाता : राज्य की पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने और उनके ऋतब्रत गुट के करीब आने के बाद तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विवाद और गहरा गया है। शनिवार को ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने कालीघाट गुट और पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में अब संगठनात्मक लोकतंत्र लगभग समाप्त हो चुका है।

ऋतब्रत ने दावा किया कि पार्टी अब एक "प्राइवेट लिमिटेड कंपनी" की तरह संचालित हो रही है, जहां निर्णय लेने का अधिकार कुछ लोगों तक सीमित है और शीर्ष नेतृत्व के अलावा किसी अन्य पर भरोसा नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे वरिष्ठ नेता के इस्तीफे के बाद भी पार्टी नेतृत्व आत्ममंथन करने को तैयार नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से लगातार वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन नेतृत्व उनके जाने के कारणों की समीक्षा करने या संगठन के भीतर बढ़ रहे असंतोष को दूर करने की कोई गंभीर कोशिश नहीं कर रहा। उनके अनुसार, असहमति रखने वाले नेताओं की बात सुनने के बजाय उन्हें किनारे कर दिया जाता है, जिससे संगठनात्मक संकट लगातार गहराता जा रहा है।

ऋतब्रत ने पार्टी की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास तृणमूल कांग्रेस के वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की जाएगी।

हालांकि, ऋतब्रत के आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के इस्तीफों और नेतृत्व को लेकर बढ़ते विवाद के बीच ऐसे आरोप पार्टी के भीतर जारी शक्ति संघर्ष और संगठनात्मक संकट को और अधिक उजागर कर रहे हैं।

Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in