तारातला हादसा : अटेंडेंस रजिस्टर नहीं होने से फंसे लोगों की संख्या का नहीं चल रहा पता

एफआईआर में नामजद मुख्य ठेकेदार भी मृतकों में शामिल
संवाददाताओं को संबोधित करते हुए एडिशनल सीपी क्राइम कुणाल अग्रवाल। साथ में हैं डीसी डीडी येलवाड श्रीकांत जगन्नाथ राव
संवाददाताओं को संबोधित करते हुए एडिशनल सीपी क्राइम कुणाल अग्रवाल। साथ में हैं डीसी डीडी येलवाड श्रीकांत जगन्नाथ राव
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कोलकाता : तारातला गोदाम हादसे में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे संभावित लोगों की सटीक संख्या का पता लगाना है। दरअसल, निर्माणाधीन गोदाम में मजदूरों की उपस्थिति (अटेंडेंस) का कोई लिखित रिकॉर्ड या रजिस्टर नहीं रखा जाता था। इसके चलते प्रशासन के पास कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है कि हादसे के वक्त वहां कुल कितने मजदूर मौजूद थे। फिलहाल एनडीआरएफ और सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। गुरुवार दोपहर लालबाजार में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कोलकाता के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम) कुणाल अग्रवाल ने जांच की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने पुष्टि की कि हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 19 घायलों का इलाज एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने बिल्डिंग के सैंक्शन प्लान से जुड़ी जानकारी के लिए केएमसी से संपर्क किया है। इसके अलावा कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट से भी गोदाम के लीज से जुड़ी जानकारी तलब की गई है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक तौर पर पता चला है कि शंभुनाथ बेहरा की कंपनी को 30 साल की लीज पर जमीन मिली थी। उसके दो भाई पहले ही कंपनी से अलग हो गये थे। फिलहाल शंभुनाथ अपनी पत्नी के साथ मिलकर कंपनी चला रहा था। बिल्डिंग का सैंक्शन प्लान हासिल करने के लिए अब्दुल हामिद ने उसकी मदद की थी।

एफआईआर में नामजद मुख्य ठेकेदार की मलबे में दबकर मौत, 4 अन्य गिरफ्तार

एडिशनल सीपी ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ-मोटो) लेते हुए केस दर्ज किया था, जिसमें पांच मुख्य आरोपियों के नाम थे। इनमें से मुख्य कांट्रेक्टर असगर हुसैन का शव गुरुवार की सुबह मलबे से बरामद किया गया। वहीं, एफआईआर में नामजद बाकी चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में 'बेहरा ब्रदर्स' (जिसने कोलकाता पोर्ट से जमीन लीज पर ली थी) के मालिक शंभुनाथ बेहरा, छत का निर्माण कर रही कंपनी 'अयान ट्रेडर्स' के बिल्डिंग सुपरवाइजर मोहम्मद गुलजार, लोहे का फ्रेम बनाने वाले कमल सामंत और लेबर सप्लायर दिवाकर भंडारी शामिल हैं। इसके अलावा कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से डिजाइन अप्रूवल कराने वाले ब्रोकर अब्दुल हामिद को भी दबोचा गया है। पुलिस के अनुसार, शंभुनाथ की पत्नी भी इस कंपनी में पार्टनर है और उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।

आरोपियों का आपराधिक इतिहास

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार सुपरवाइजर मोहम्मद गुलजार और मृत ठेकेदार असगर हुसैन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। गुलजार इकबालपुर में मारपीट के एक मामले में शामिल था, जबकि असगर के खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज थे। इसमें एक वर्ष 2013 में साउथ पोर्ट थाने में मारपीट और दूसरा इकबालपुर थाने में अपहरण का मामला शामिल है।

फोन रिकॉर्ड की जांच और जीवित बचे लोगों से होगी पूछताछ

जांच को आगे बढ़ाने के लिए लालबाजार के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट की कई टीमें जुटी हुई हैं। एडिशनल सीपी कुणाल अग्रवाल ने कहा, "हमने पूछताछ के लिए संदिग्धों और गवाहों की एक सूची तैयार की है। मलबे से सुरक्षित बचाए गए लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा, मौके पर मौजूद रहे लोगों के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं ताकि वहां काम करने वाले अन्य मजदूरों के बारे में सुराग मिल सके।"

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