शिक्षकों के लिए 'निष्ठा' ऑनलाइन प्रशिक्षण अनिवार्य!

भाषा पर विवाद, शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
विकास भवन
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और सरकार प्रायोजित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं सहायक शिक्षकों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन 'निष्ठा' प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शिक्षकों को हर वर्ष कम से कम 50 घंटे का सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) प्रशिक्षण पूरा करना होगा। यह प्रशिक्षण केंद्र सरकार के 'दीक्षा' डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कराया जाएगा।

पश्चिम बंगाल समग्र शिक्षा मिशन ने 24 जुलाई को इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी पात्र शिक्षकों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने को कहा है।

प्रशिक्षण में आधुनिक शिक्षण पद्धति, गतिविधि आधारित शिक्षा, कक्षा प्रबंधन, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने तथा शिक्षकों के पेशेवर कौशल विकास जैसे विषय शामिल हैं। ऑनलाइन पंजीकरण 21 अप्रैल से शुरू हो चुका है और 31 अगस्त तक चलेगा।

विभाग का कहना है कि यह प्रशिक्षण भविष्य में पदोन्नति और वेतन वृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। हालांकि, प्रशिक्षण केवल हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होने पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है।

उनका कहना है कि बंगाली, नेपाली, उर्दू और ओलचिकी माध्यम के शिक्षकों को उनकी मातृभाषा में प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध होने पर ही प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा।

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