आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी सुंदरवन की नंदिनी

पति की मौत के बाद राज्य सरकार की विधवा भत्ता योजना बना सहारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष
नंदिनी माइती पापड़ बनाती हुई
नंदिनी माइती मसाला पापड़ बनाती हुई
Published on

रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता

दक्षिण 24 परगना : कहते हैं कि यदि इंसान मन में कुछ करने की ठान ले, तो दुनिया की कोई भी ताकत उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। इस कहावत को सच कर दिखाया है सुंदरवन के पाथरप्रतिमा ब्लॉक के कुयेमुरी गांव की रहने वाली 34 वर्षीय नंदिनी माइती ने। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि आज कई अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। मिली जानकारी के अनुसार करीब दस वर्ष पहले नंदिनी के पति का निधन हो गया था। अचानक आई इस विपत्ति ने उन्हें गहरे सदमे और निराशा में डाल दिया। ऐसे कठिन समय में राज्य सरकार की विधवा भत्ता योजना उनके लिए एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण सहारा बनी। इसी दौरान उन्होंने तय किया कि वह परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानेंगी और अपने पैरों पर खड़ी होकर जीवन को नई दिशा देंगी। नंदिनी को स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के माध्यम से सोनारपुर स्थित पीएनबी आरएसईटी दक्षिण 24 परगना में मुफ्त प्रशिक्षण की जानकारी मिली। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने वहां से पापड़, अचार और मसाला पापड़ बनाने का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने छोटे स्तर पर अपना काम शुरू किया और धीरे-धीरे यह उनका स्थायी रोजगार बन गया। आज नंदिनी माइती न केवल अच्छी आमदनी कर रही हैं, बल्कि लगभग 40 जरूरतमंद लोगों को पापड़, अचार और मसाला पापड़ बनाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रही हैं। वह जिले में आयोजित कई मेलों में अपने उत्पादों के साथ भाग ले चुकी हैं। उनके उत्पाद फिलहाल राजारहाट के जैव हाट ऑर्गेनिक बाजार में भी बिकते हैं। नंदिनी का मानना है कि महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में डरना नहीं चाहिए। उनका कहना है कि अगर महिलाएं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो वे हर चुनौती का सामना कर सकती हैं। आज वह विभिन्न संस्थाओं में प्रशिक्षण देकर अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in