

रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : ऐतिहासिक गंगासागर मेले का विधिवत उद्घाटन राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 8 जनवरी को कर दिया है। यह मेला 17 जनवरी तक चलेगा। मेले के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पश्चिम बंगाल पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्री पहले कोलकाता के बाबू घाट स्थित आउट्राम घाट में बने ट्रांजिट पॉइंट पर ठहरते हैं और फिर मकर संक्रांति के अवसर पर पुण्य स्नान के लिए सागर द्वीप की ओर रवाना होते हैं। हालांकि इस वर्ष आउट्राम घाट पर तीर्थयात्रियों की संख्या में पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। इसका सीधा असर यहां रहने वाले और दान पर निर्भर संन्यासियों पर पड़ा है। संन्यासियों का कहना है कि पहले जहां प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये तक की प्रणामी मिल जाती थी, वहीं अब किसी तरह 300 रुपये ही जुट पा रहे हैं।
संन्यासियों का बयान :
संन्यासी माया नंद गिरी ने बताया कि तीर्थयात्रियों की संख्या घटने से उन्हें मिलनेवाली प्रणामी में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यहां कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता। ठंड से बचने के लिए कैट (बिस्तर) खरीदना पड़ता है और भोजन की व्यवस्था भी खुद करनी पड़ती है, जिससे खर्च लगातार बढ़ रहा है।
वहीं तारकेश्वर से आई संन्यासी अनुराधा गिरी ने बताया कि वह 24 दिसंबर से आउट्राम घाट में रह रही हैं, लेकिन इस बार पहले जैसी भीड़ नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि पहले दान के रूप में फल-फूल और अन्य सामग्री भरपूर मिलती थी, लेकिन इस वर्ष उसमें भी काफी कमी आई है। इससे रोजमर्रा के खर्च और जीवन-यापन पर असर पड़ रहा है।
हालांकि संन्यासियों ने राज्य सरकार द्वारा की गई व्यवस्था की सराहना की और कहा कि प्रशासन की ओर से सुविधाएं पहले की तुलना में बेहतर हैं। इसके बावजूद तीर्थयात्रियों की कम आमद ने संन्यासियों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है, जो इस बार के गंगासागर मेले की एक अहम चिंता बनकर उभरी है।