आरजी कर की यादें ताजा, दो साल बाद भी सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार

आरजी कर कांड के दो साल बाद भी डॉक्टरों और प्रदर्शनकारियों का सवाल बरकरार—क्या अब हम सुरक्षित हैं?
Kolkata
फाइल फोटो
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कोलकाता : आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की जूनियर डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या की घटना को दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन डॉक्टरों, चिकित्सा कर्मियों और नागरिक समाज के बीच एक सवाल आज भी गूंज रहा है—"क्या अब हम पहले से ज्यादा सुरक्षित हैं?"

घटना की दूसरी बरसी पर कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में डॉक्टरों, सामाजिक संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने फिर से न्याय, जवाबदेही और कार्यस्थल की सुरक्षा की मांग उठाई।

आंदोलन से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई घोषणाएं और आश्वासन दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी अनेक सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था, महिला डॉक्टरों के लिए सुरक्षित ड्यूटी वातावरण और आपातकालीन सुरक्षा तंत्र की कमी महसूस की जा रही है।

उनका कहना है कि केवल एक मामले में कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र में स्थायी सुधार की आवश्यकता है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस जघन्य घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कई खामियों को उजागर किया था।

उनका कहना है कि अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने और महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने की दिशा में अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है।

डॉक्टरों का कहना है कि आरजी कर कांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि इसने पूरे देश में चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी थी।

दो वर्ष बाद भी मेडिकल समुदाय का मानना है कि जब तक अस्पतालों में व्यापक सुरक्षा सुधार, जवाबदेही और पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक स्वास्थ्यकर्मी स्वयं को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएंगे।

इस बीच, राज्य सरकार ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की दोबारा जांच के लिए कदम उठाने और एक जांच आयोग गठित करने की घोषणा की है।

वहीं डॉक्टर संगठनों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने की मांग पर केंद्रित है।

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