मारवाड़ी संस्कृति मंच : परंपरा, परिवर्तन और प्रगतिशील चेतना का सशक्त वाहक

ललित प्रहलादका ( संस्थापक अध्यक्ष - मारवाड़ी संस्कृति मंच) , राजस्थान दिवस पर विशेष
मारवाड़ी संस्कृति मंच : परंपरा, परिवर्तन और प्रगतिशील चेतना का सशक्त वाहक
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : भारतीय संस्कृति की समृद्ध धारा में राजस्थानी संस्कृति का विशेष स्थान है—जहाँ परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान का जीवन-मूल्य और भविष्य की दिशा है। ऐसे समय में जब वैश्वीकरण और आधुनिकता की तेज़ आँधियाँ स्थानीय भाषाओं, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों को प्रभावित कर रही हैं, मारवाड़ी संस्कृति मंच का सतत और समर्पित प्रयास कोलकाता ही नहीं पूरे भारत में राजस्थानी संस्कृति को समृद्ध करने का शंखनाद कर रहा है।

वर्ष 2013 से यह मंच राजस्थानी भाषा, संस्कृति, संस्कार और सामाजिकता के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर सक्रिय है। यह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत अभियान है, जो समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का कार्य कर रहा है। आज जब नई पीढ़ी अपनी परंपराओं से दूर होती जा रही है, ऐसे में मंच का यह प्रयास एक सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है।

मंच द्वारा आयोजित होली-दीवाली महोत्सव, श्रावणी तीज और विशेष रूप से दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में आयोजित 8 दिवसीय मरूधर मेला न केवल उत्सव हैं, बल्कि यह सामूहिक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अवसर हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे समाज के हर वर्ग—विशेषकर युवा पीढ़ी—को अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।

राजस्थान के साथ हरियाणा और शस्य श्यामला बंगाल की संस्कृति और संस्कार को समाहित कर मंच ने जन्मभूमि और कर्मभूमि के बीच तादात्म्य का अनोखा उदाहरण पेश किया है।

परंतु मंच का कार्य केवल उत्सवों तक सीमित नहीं है। यह संगठन सामाजिक सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आधुनिकता के नाम पर समाज में जड़ जमा रही विसंगतियों,अपसंस्कृति, दिखावा, आडंबर, फिजूलखर्ची, युवाओं में बढ़ती व्यसन की प्रवृत्ति आदि के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाकर मंच ने यह सिद्ध किया है कि सच्ची संस्कृति वही है, जो आत्ममंथन और सुधार की क्षमता रखती हो। परंपरा के नाम पर अंधानुकरण नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण आचरण ही समाज को आगे बढ़ाता है—यह संदेश मंच निरंतर दे रहा है।

आज आवश्यकता है कि समाज के अधिकाधिक लोग इस प्रकार के प्रयासों से जुड़ें और इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। संस्कृति का संरक्षण केवल आयोजनों से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में उसके अनुपालन से होता है। जब तक हमारे आचरण में संस्कार और सामाजिकता का समावेश नहीं होगा, तब तक संरक्षण का उद्देश्य अधूरा रहेगा।

मारवाड़ी संस्कृति मंच का मानना है कि यदि संकल्प मजबूत हो और उद्देश्य स्पष्ट, तो सीमित संसाधनों में भी व्यापक परिवर्तन संभव है। यह मंच न केवल अतीत की गौरवगाथा को संजो रहा है, बल्कि एक सशक्त, संस्कारित और जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में भी मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

समाज के हर जागरूक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह इस प्रयास में सहभागी बने—क्योंकि संस्कृति केवल विरासत नहीं, हमारी पहचान है; और उसकी रक्षा, हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी।

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