

कोलकाता : महानगर में एक शिक्षक को 25 दिनों तक लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखकर ठगों ने उनसे 53 लाख रुपये ऐंठ लिये। पीड़ित शिक्षक विपुल साहा इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मानसिक रूप से इस कदर दबाव में रहे कि उन्हें सोचने-समझने का अवसर तक नहीं मिला। घटना को लेकर कसबा थाने में शिकायत दर्ज करायी गयी है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, 2 दिसंबर से 27 दिसंबर 2025 तक विपुल साहा को उनके ही घर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ की स्थिति में रखा गया। ठगों ने खुद को सीबीआई और ईडी का अधिकारी बताते हुए उनसे संपर्क किया। फोन पर ‘विजय खन्ना’ और ‘निशा पटेल’ नामक दो लोगों ने क्रमशः फर्जी सीबीआई और ईडी अधिकारी बनकर बात की। पहले दरियागंज थाने के नाम पर समन भेजा गया, जिसके बाद पुलिस, ईडी और सीबीआई के नाम से लगातार कॉल आने लगे।
ठगों ने एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट के जज ‘राहुल गुप्ता’ के नाम से नकली अदालत की कार्यवाही भी दिखाई। 13 दिनों के भीतर कथित रूप से ‘सुनवाई’ करवाई गई। पीड़ित के अनुसार, दस्तावेज इतने विश्वसनीय लग रहे थे कि उन्हें सब कुछ वास्तविक प्रतीत हुआ। आरोपितों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें किसी को भी इस बारे में बताने से मना किया। यहां तक कि उनकी बेटी को भी जानकारी देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गयी।
पीड़ित शिक्षक ने बताया कि उन्हें बाथरूम जाने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती थी। खाना खाते समय भी मोबाइल कैमरा ऑन रखना अनिवार्य था और फोन एक मिनट के लिए भी बंद करने की इजाजत नहीं थी। लगातार मानसिक दबाव और भय के माहौल में उनसे कहा गया कि यदि वे 53 लाख रुपये एक विशेष खाते में जमा कर देंगे तो ‘एआई आधारित 11 स्तर की जांच’ के बाद उन्हें मुक्त कर दिया जाएगा। आखिरकार, जब रकम वापस नहीं मिली और संपर्क टूट गया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। 25 दिनों के बाद ठगों ने संपर्क समाप्त कर दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद विपुल साहा ने कसबा थाने में शिकायत दर्ज करायी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।