दोस्त ने मेडिकल इमरजेंसी का बहाना बनाकर ठग लिये 6.90 लाख

पर्णश्री थाना इलाके की घटना
फाइल फोटो
फाइल फोटो
Published on

कोलकाता : दोस्ती और भरोसे का फायदा उठाकर 6.90 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात के आरोपों में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना पर्णश्री थाना इलाके की है।

क्या है पूरा मामला

शिकायतकर्ता उत्सव राय ने आरोप लगाया है कि प्रीतम नाथ ने उनसे करीब 6.90 लाख रुपये उधार लेकर वापस नहीं किए। पीड़ित के अनुसार, प्रीतम नाथ उनके परिचित थे और दोनों के बीच अच्छे संबंध थे। जनवरी 2025 में आरोपित ने अपने परिवार में गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का हवाला देते हुए उनसे आर्थिक मदद मांगी। उसने जल्द पैसे लौटाने का भरोसा दिया, जिस पर विश्वास कर उत्सव रॉय ने मदद करने के लिए सहमति दे दी। इसके बाद मार्च 2025 में आरोपित ने दोबारा संपर्क कर बताया कि परिवार के सदस्य की हालत और गंभीर हो गई है और इलाज के लिए तुरंत 6.90 लाख रुपये की जरूरत है। आरोपित के बार-बार अनुरोध करने पर पीड़ित ने मार्च से अप्रैल 2025 के बीच कई किस्तों में यह रकम दी। शिकायत के अनुसार, कुछ पैसे आरोपित के बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से भेजे गए, जबकि उसकी पत्नी श्रेयसी मंडल और सहयोगी सुमन मिद्दे के बैंक खातों में भी उसके कहने पर कई बार रकम ट्रांसफर की गई। इसके अलावा करीब 1.70 लाख रुपये नकद भी आरोपित को गवाहों की मौजूदगी में दिए गए। हालांकि पैसे लेने के बाद आरोपित ने उन्हें लौटाने में टालमटोल शुरू कर दी। बाद में 20 जून 2025 को दोनों के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत आरोपित ने भुगतान के आश्वासन के साथ दो पोस्ट-डेटेड चेक भी दिए। पीड़ित का आरोप है कि 27 जुलाई 2025 को आरोपित ने वॉट्सऐप के जरिए 2.40 लाख रुपये ट्रांसफर करने का फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर दावा किया कि पैसे उनके खाते में जल्द आ जाएंगे लेकिन काफी इंतजार के बाद भी रकम खाते में नहीं आई। जांच करने पर पता चला कि भेजा गया ट्रांजैक्शन स्क्रीनशॉट पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत था। उत्सव रॉय ने आरोप लगाया है कि आरोपित ने शुरू से ही धोखाधड़ी की मंशा से झूठे बहाने बनाकर उनसे पैसे लिये और बाद में जाली दस्तावेजों के जरिए उन्हें गुमराह करने की कोशिश की।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in