

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस की कानूनी रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर नई खींचतान सामने आई है। लंबे समय तक पार्टी और ममता बनर्जी के भरोसेमंद वकील रहे कल्याण बनर्जी अब खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।
इसकी वजह यह बताई जा रही है कि कई अहम मामलों में तृणमूल नेतृत्व का झुकाव अब वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी की ओर बढ़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इसी बदलती प्राथमिकता ने कल्याण बनर्जी की नाराजगी बढ़ा दी है।
श्रीरामपुर से तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी लंबे समय से पार्टी के प्रमुख कानूनी चेहरों में रहे हैं। सिंगुर-नंदीग्राम, रिजवानुर रहमान, एसएससी भर्ती भ्रष्टाचार और अन्य संवेदनशील मामलों में उन्होंने पार्टी या राज्य सरकार की ओर से पैरवी की है।
हाल के दिनों में तृणमूल नेतृत्व और कल्याण बनर्जी के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक मामले से खुद को अलग करने और ममता बनर्जी के लिए आगे मुकदमे नहीं लड़ने जैसे बयानों ने इन अटकलों को और हवा दी है।
सूत्रों का दावा है कि हाल ही में कालीघाट में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में हुई एक बैठक के दौरान कल्याण बनर्जी ने दूसरे वकीलों को तरजीह दिए जाने पर आपत्ति जताई। खास तौर पर मेनका गुरुस्वामी की बढ़ती भूमिका को लेकर उनकी नाराजगी सामने आई।
मेनका ने ईडी से जुड़े एक अहम मामले में राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की थी। इसके बाद से पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा और बढ़ा है। यही कारण है कि अब तृणमूल कई महत्वपूर्ण मामलों में मेनका गुरुस्वामी और अन्य वकीलों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।