

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय चुनाव आयोग के साथ आधिकारिक संवाद को लेकर बड़ा संगठनात्मक फैसला किया है। पार्टी ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि तत्काल प्रभाव से अब केवल सांसद अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ'ब्रायन ही आयोग के समक्ष तृणमूल कांग्रेस की ओर से आधिकारिक रूप से संवाद करने के लिए अधिकृत होंगे।
पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भविष्य में चुनाव आयोग के समक्ष तृणमूल कांग्रेस का पक्ष रखने, पत्राचार करने, दस्तावेज जमा करने तथा किसी भी प्रकार का आधिकारिक संवाद करने का अधिकार केवल इन दोनों नेताओं के पास होगा। पार्टी ने आयोग से भी अनुरोध किया है कि आगे से केवल इन्हीं दोनों नेताओं के माध्यम से प्राप्त संचार को आधिकारिक माना जाए।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को हाल के घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है, जब ऋतब्रत गुट के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर पार्टी पर अपना दावा पेश करने की कोशिश की थी। माना जा रहा है कि इसी के बाद नेतृत्व ने यह कदम उठाकर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि पार्टी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधित्व को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं रहने दी जाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने और आधिकारिक संचार व्यवस्था को केंद्रीकृत करने की रणनीति का हिस्सा है। ऐसे समय में जब तृणमूल कांग्रेस आंतरिक खींचतान और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों का सामना कर रही है, चुनाव आयोग के साथ संवाद का अधिकार दो वरिष्ठ नेताओं तक सीमित करना संगठन की स्पष्ट और एकजुट आधिकारिक लाइन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।