

रामबालक
कोलकाता : महेशतल्ला पालिका के वार्ड नंबर 10 के कचरा डंपिंग ग्राउंड से सटी श्रमिक बस्ती में लगी आग के 13 दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित 63 परिवारों के सिर पर अब तक कोई छत नहीं मिली है। फिलहाल उनकी जमीनें खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं। चारों ओर घेराबंदी कर दी गई है। उनके सिर पर छत कब मिलेगी, इसे लेकर प्रभावित नगर निगम के सफाईकर्मी और उनके परिवारजन बेहद चिंतित हैं। इनमें से कुछ लोगों ने कर्ज लेकर और राहत के तौर पर मिले तिरपाल से झोपड़ी बनाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। वजह यह है कि ऊपर तिरपाल डाल देने के बावजूद चारों ओर ठंडी हवा रोकने के लिए टिन या बांस की बाड़ की व्यवस्था वे नहीं कर सके। स्वाभाविक रूप से ऐसी स्थिति में वे अधिकांश रातों में सो भी नहीं पा रहे हैं। गौरतलब है कि 25 दिसंबर की शाम आग लगने की घटना में कचरा डंपिंग ग्राउंड से सटी इस श्रमिक बस्ती के 63 घर जलकर राख हो गये थे। महेशतल्ला पालिका के प्रभावित श्रमिकों की इस दुर्दशा को वार्ड नंबर 10 के पार्षद और ब्लॉक तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष सुमन रायचौधरी ने भी स्वीकार किया है। आगे उन्होंने कहा, “एक या दो नहीं, पूरे 63 घर और कुल मिलाकर लगभग 180 सदस्य बेहद कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में घर बनाने में समय लगेगा, इसी कारण कुछ देरी हो रही है। “हम सभी ने मिलकर तय किया है कि हर परिवार के लिए टिन या टाली की छत बनाई जाएगी। दीवारों के लिए टिन की घेराबंदी होगी। अगले तीन-चार दिनों में यह सारा सामान आ जाएगा। इसके बाद घर बनाने में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा।”
इस बीच, पास के एक स्कूल में अस्थायी राहत शिविर में उनके रहने की व्यवस्था की गई है। साथ ही रोजाना भोजन की भी व्यवस्था की जा रही है। पहले ही कपड़े, कंबल और सर्दियों के कपड़े वितरित किए जा चुके हैं। आग में आधार कार्ड, वोटर कार्ड समेत सभी जरूरी दस्तावेज जल गए थे, जिससे एसआईआर फॉर्म भरने में परेशानी हो रही थी। अंततः अलीपुर उप-मंडल अधिकारी से डोमिसाइल प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया। शनिवार को सभी की सुनवाई बीडीओ कार्यालय में हुई। घर बन जाने के बाद आधार समेत अन्य दस्तावेज भी बनवाए जाएंगे।