फाइल फोटो
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लकी नंबर या तबाही का जाल?

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लालबाजार के रडार पर ''ऑनलाइन सट्टा मटका'' का खेल

कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुआ मामला

दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता :

अगर सोशल मीडिया पर रील देखते-देखते अचानक आपके मोबाइल स्क्रीन पर एक मैसेज चमकता है कि \"छोटा निवेश, बड़ा मुनाफा! गारंटीड जीत! \" तो सावधान हो जाइए। यह कोई साधारण विज्ञापन नहीं, बल्कि साइबर जालसाजों का बिछाया वह खूनी जाल है, जिसमें फंसकर हजारों लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा रहे हैं। फर्जी ''ऑनलाइन सट्टा मटका'' ऐप्स के जरिए हो रही इस भारी धोखाधड़ी पर अब कोलकाता पुलिस के मुख्यालय ''लालबाजार'' ने पूरी तरह शिकंजा कस दिया है। लालबाजार के साइबर क्राइम थाने में अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आईटी एक्ट और ''प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग'' (PROG) कानून के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

मिटाए गए physical ठेके, तो शुरू हुआ ''डिजिटल'' खेल

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के दक्षिणी उपनगरों, पूर्वी कोलकाता और रेलवे ट्रैक के किनारे चलने वाले सट्टे के पारंपरिक अड्डों को पुलिस ने हाल के महीनों में पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। भौतिक अड्डे बंद हुए तो शातिर अपराधियों ने अपनी राह बदल ली और ''ऑनलाइन सट्टा मटका'' का धंधा शुरू कर दिया। कभी मिट्टी के मटके से नंबरों की पर्ची निकालकर खेला जाने वाला यह जुआ अब स्मार्टफोन्स की स्क्रीन पर ''जोड़ी'' (दो नंबरों का मेल) और ट्रिपल नंबरों के खेल में तब्दील हो चुका है।

यूट्यूब और वॉट्सऐप से फैलाया जा रहा जाल

साइबर अपराधियों का यह गिरोह मुख्य रूप से वॉट्सऐप और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रहा है। सोशल मीडिया पर दावों की बौछार की जाती है कि हर दांव पर कुछ न कुछ इनाम पक्का मिलेगा। इतना ही नहीं, लोगों को झांसे में लेने के लिए यह झूठा प्रचार भी किया जा रहा है कि रोजाना एक करोड़ से अधिक लोग इसमें पैसे लगा रहे हैं।

शुरुआती जीत का ''मीठा जहर'' और फिर सब कुछ साफ

जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस ठगी का पैटर्न बेहद खतरनाक है। जब कोई नया यूजर लालच में आकर ऐप डाउनलोड करता है और छोटी रकम लगाता है, तो उसे जानबूझकर जिताया जाता है। बैंक खाते में पैसे आते ही खिलाड़ी का लालच और भरोसा बढ़ जाता है। इसके बाद जैसे ही वह बड़ी रकम दांव पर लगाता है, ऐप का एल्गोरिदम और ठगों का चक्रव्यूह उसे पूरी तरह कंगाल कर देता है। हारने के बाद भी जुए की लत और खोए हुए पैसे वापस पाने की चाहत में इंसान कर्ज में डूबता चला जाता है।

लालबाजार साइबर क्राइम थाने का कड़ा रुख

कोलकाता में एक विशेष ऑनलाइन सट्टे की भारी मांग को देखते हुए जालसाज फर्जी ऐप का लिंक भेजकर डाउनलोड करवा रहे थे। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस हरकत में आई है। साइबर क्राइम थाना अब उन यूट्यूब चैनलों, वॉट्सएप ग्रुप्स और डिजिटल आईपी एड्रेस को खंगाल रही है, जिनके जरिए यह फर्जी ऐप चलाया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस बड़े सिंडिकेट के मास्टरमाइंड सलाखों के पीछे होंगे।
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