आरजी कर लिफ्ट हादसा : घटना के समय 7वें तल्ले पर म्यूजिक सुन रहे थे लिफ्टमैन !
कोलकाता : आरजी कर अस्पताल के ट्रॉमा केयर बिल्डिंग में हुए दर्दनाक लिफ्ट हादसे की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि शुक्रवार सुबह जिस वक्त यह हादसा हुआ, लिफ्ट नंबर 2 का ऑपरेटर ड्यूटी छोड़कर 7वीं मंजिल के एक कमरे में अन्य कर्मचारियों के साथ म्यूजिक सुन रहा था। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में गिरफ्तार किए गए पांचों सिक्योरिटी गार्ड और लिफ्टमैन से पूछताछ की गई, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार लोगों ने पुलिस को बताया कि उनमें से कोई भी नाइट ड्यूटी के दौरान लिफ्ट में नहीं रहता है। ऐसा कई सालों से हो रहा है। एक लिफ्टमैन ने पुलिस के सामने माना कि घटना वाली रात, ड्यूटी के दौरान लिफ्टमैन सातवीं मंजिल पर बातें कर रहा था। रविवार को पुलिस आरजी कर अस्पताल गई और लिफ्टमैन और सिक्योरिटी गार्ड की लॉग बुक, रोस्टर बुक और रजिस्टर बुक जब्त कर लीं। कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने बताया कि शुरुआती जांच में लिफ्ट की खराबी दुर्घटना का कारण लग रही है, लेकिन मानवीय चूक और तकनीकी खराबी के सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है। जांच के दायरे में एक सीआईएसएफ कर्मी और दो पुलिसकर्मी भी हैं।लिफ्ट में मैकेनिकल फॉल्ट आये सामने
डीडी की जांच में कई मैकेनिकल फॉल्ट सामने आए हैं, जैसे लिफ्ट के सेंसर काम नहीं कर रहे थे। इसके अलावा, पुलिस इस लिफ्ट हादसे के पीछे 'इंसानी गलती' और लिफ्ट में कुछ समय के लिए बिजली जाने की थ्योरी की भी जांच कर रही है। पुलिस को अरूप के करीबियों से यह भी पता चला कि उसकी शर्ट का कुछ हिस्सा लिफ्ट के दरवाज़े में फंस गया था। ऐसे में एक लिफ्टमैन ने लिफ्ट को ऊपर से ऊपर उठाने के लिए बटन दबाया। तभी लिफ्ट ऊपर उठने लगी। लेकिन यहां पुलिस का सवाल है कि जब तक ऑटोमैटिक लिफ्ट का दरवाज़ा पूरी तरह बंद न हो, तब तक लिफ्ट स्टार्ट नहीं होती, तो अरूप का शरीर या शर्ट दरवाज़े में फंसा होने के बावजूद वह कैसे स्टार्ट हुई? इस मामले में, जांच अधिकारियों को यकीन है कि उस समय लिफ्ट का सेंसर काम नहीं कर रहा था।
जांच और ऑडिट पर सवाल
फॉरेंसिक एक्सपर्ट पहले ही लिफ्ट के सेंसर, स्विच और सर्किट की जांच कर चुके हैं। लिफ्ट में कभी-कभी बिजली चली जाती थी। इसी वजह से लिफ्ट बंद हो जाती थी। पुलिस ने सवाल उठाया है कि लिफ्टमैन ने यह सब जानने के बावजूद अधिकारियों को क्यों नहीं बताया। लिफ्ट की जांच के बाद भी फॉरेंसिक को कई बातें साफ नहीं हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस लिफ्ट का निरीक्षण इसी महीने की शुरुआत में हुआ था। लिफ्ट कंपनी हर 25-30 दिनों में ऑडिट करती है और मार्च के पहले सप्ताह में हुई जांच में कोई बड़ी तकनीकी खामी नहीं पाई गई थी। पुलिस अब पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिकल विभाग और लिफ्ट कंपनी के साथ मिलकर सोमवार को सिस्टम का संयुक्त परीक्षण करेगी।

