NEP और NTA के विरोध में वाम छात्र संगठनों का मार्च

देशव्यापी आंदोलन तेज करने का ऐलान, शिक्षा के निजीकरण का किया विरोध
File Photo
File Photo
Published on

कोलकाता : केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बावजूद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) को वापस लेने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने तथा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग को लेकर मंगलवार को वामपंथी छात्र संगठनों ने कॉलेज स्ट्रीट से विरोध मार्च निकाला। रैली में बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए और केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।

रैली के समापन पर एसएफआई के राज्य सचिव देबांजन डे ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस कार्रवाई और झूठे मुकदमों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदमों से छात्र आंदोलन कमजोर नहीं होगा, बल्कि और व्यापक रूप लेगा। उनके अनुसार, एनईपी-2020 के माध्यम से सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा।

देबांजन डे ने 24 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समर्थित तत्वों ने आंदोलन को बाधित करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार और समान अवसर की लड़ाई जारी रहेगी तथा छात्रों की सभी मांगें पूरी होने तक राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

इस दौरान वाम छात्र संगठनों और प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा की एक रैली में कवि सुकांत भट्टाचार्य की तस्वीर वाले डीवाईएफआई के झंडे पर जूता लटकाने की कथित घटना की कड़ी निंदा की। कांग्रेस नेताओं ने इसे बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इस आरोप पर समाचार लिखे जाने तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in