कोलकाता की ऐतिहासिक इमारतें शहर की शान : कलकत्ता हाईकोर्ट

कहा इनके संरक्षण की जिम्मेदारी सभी की
Kolkata
ऐतिहासिक इमारतें शहर की शान : कलकत्ता हाईकोर्ट
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कोलकाता : कोलकाता की ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शहर की सबसे पुरानी और आज भी मौजूद ऐतिहासिक इमारतें कोलकाता की पहचान और गौरव हैं। इन धरोहरों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे, यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।

इसमें अदालत की भी अहम भूमिका है। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने यह टिप्पणी जवाहरलाल नेहरू रोड स्थित 9, 10 और 11 नंबर की पुरानी इमारतों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की।

1787 में बनी इमारत के संरक्षण पर विवाद

मामले में सबसे महत्वपूर्ण इमारत 9 जवाहरलाल नेहरू रोड पर स्थित तीन मंजिला भवन है, जिसका निर्माण 1787 में हुआ था। इसे कोलकाता की सबसे पुरानी सुरक्षित बची निजी इमारत माना जाता है। कोलकाता नगर निगम (KMC) की हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी ने भी इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के शुरुआती दौर की महत्वपूर्ण स्थापत्य कला का उदाहरण बताया है।

यह संपत्ति पहले बगदादी यहूदी व्यापारी और प्रॉपर्टी डेवलपर डेविड जोसेफ एजरा के स्वामित्व में थी। आजादी के बाद इसे मेट्रोपॉलिटन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने खरीदा था। 1956 में बीमा क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण के बाद इसका स्वामित्व भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास आ गया।

LIC और किरायेदारों के बीच मरम्मत को लेकर विवाद

इमारत में रहने वाले किरायेदारों ने आरोप लगाया है कि LIC ने लंबे समय से इसकी मरम्मत नहीं कराई और उन्हें भी संरक्षण कार्य करने की अनुमति नहीं दी। दूसरी ओर, LIC ने इमारत खाली कराने की मांग की है। KMC ने भवन की मरम्मत और पुनरुद्धार का समर्थन किया है।

नगर निगम की ओर से नियुक्त संरक्षण वास्तुकार पार्थ रंजन दास ने अपनी जांच में कहा कि सात दशक से अधिक समय तक मरम्मत नहीं होने के बावजूद इमारत की संरचनात्मक स्थिति आश्चर्यजनक रूप से मजबूत है। उन्होंने इसके संरक्षण की सिफारिश की है। मेट्रो रेलवे और कोलकाता मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (KMRC) ने भी संकेत दिया है कि इमारत की संरचना सुरक्षित है।

9 दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपेगी विशेष कमेटी

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने इमारत की वास्तविक स्थिति और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। इसमें KMC कमिश्नर, निगम के बिल्डिंग विभाग के महानिदेशक, कोलकाता पुलिस कमिश्नर द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारी और LIC चेयरमैन द्वारा नियुक्त वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

कमेटी राज्य के मुख्य सचिव द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में काम करेगी। उसे 9 दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

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