

कोलकाता : कोलकाता पोर्ट ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 15.6 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। जानकारी के अनुसार श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता (SMPK) ने मई से अब तक 24 अलग-अलग भूखंडों में फैली इस जमीन को अपने कब्जे में वापस लिया है।
यह कार्रवाई पोर्ट प्राधिकरण और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच समन्वय से चलाए गए अभियान के तहत की गई। केंद्र सरकार ने इस संबंध में राज्यसभा में भी जानकारी दी है।
24 भूखंडों से हटाया गया अतिक्रमण
पोर्ट की जमीन लंबे समय से अलग-अलग हिस्सों में अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही थी। इसे देखते हुए पोर्ट प्राधिकरण ने जमीन की पहचान कर उसे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की। अभियान के दौरान कुल 15.6 एकड़ जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। जमीन अलग-अलग 24 हिस्सों में थी, जिसके कारण कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की गई।
पोर्ट की जमीन व्यावसायिक और परिचालन गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में अतिक्रमण हटाकर जमीन को दोबारा पोर्ट के नियंत्रण में लाना उसके बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार के साथ मिलकर चला अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अकेले पोर्ट प्रशासन ने नहीं की, बल्कि इसमें राज्य सरकार की एजेंसियों का भी सहयोग लिया गया। पोर्ट अधिकारियों और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय के बाद अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की गई।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोलकाता पोर्ट की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा पहले भी संसद में उठ चुका है। अगस्त 2025 में केंद्र सरकार ने बताया था कि कोलकाता डॉक सिस्टम की करीब 170.4 एकड़ जमीन पर 706 अतिक्रमणकारी मौजूद थे। सरकार ने यह भी माना था कि अतिक्रमण के कारण पोर्ट को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
अतिक्रमण से पोर्ट को हो रहा था नुकसान
पोर्ट की जमीन का इस्तेमाल माल ढुलाई, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और अन्य बंदरगाह संबंधी गतिविधियों के लिए किया जाता है। जमीन पर लंबे समय तक कब्जा रहने से न केवल उपलब्ध भूमि का उपयोग प्रभावित होता है, बल्कि पोर्ट की संपत्ति से होने वाली संभावित आय पर भी असर पड़ता है।
15.6 एकड़ जमीन वापस मिलने के बाद पोर्ट प्रबंधन के सामने अब इसे भविष्य की जरूरतों के मुताबिक इस्तेमाल करने की संभावना बढ़ गई है। केंद्र की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के बाद यह कार्रवाई पोर्ट की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति के तौर पर सामने आई है।