दुर्गापूजा से पहले अतिरिक्त पार्किंग स्थल की तलाश में कोलकाता पुलिस

बड़े पंडालों के आसपास बढ़ेगी व्यवस्था
Kolkata
बड़े पंडालों के आसपास अतिरिक्त पार्किंग स्थल की तलाश
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कोलकाता : दुर्गापूजा के दौरान शहर में उमड़ने वाली भारी भीड़ और वाहनों की संख्या को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने बड़े पूजा पंडालों के आसपास अतिरिक्त पार्किंग स्थल तलाशने की कवायद शुरू कर दी है।

कई वाहन चालकों की शिकायत है कि आधिकारिक पार्किंग स्थल पंडालों से काफी दूर हैं और उन्हें 1 से 2 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए पुलिस स्थानीय थाना स्तर पर नए पार्किंग विकल्प तलाश रही है।


कई बड़े पंडालों में 50-80 फीसदी तक बढ़ सकती है भीड़

लालबाजार के अधिकारियों के अनुसार, मध्य और दक्षिण कोलकाता के कम से कम सात प्रमुख पूजा पंडालों में इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक अधिक भीड़ पहुंचने की संभावना है। खास तौर पर पार्क स्ट्रीट, चेतला-अलीपुर, किद्दरपुर, बेहला और संतोषपुर जैसे इलाकों में नए आकर्षण जुड़ने से पहले से लोकप्रिय पूजा पंडालों पर दबाव बढ़ सकता है।


छोटी सड़कों और खाली जगहों को अस्थायी पार्किंग में बदलने की योजना

कोलकाता ट्रैफिक पुलिस छोटी सड़कों, गलियों और खाली पड़ी जगहों को अस्थायी पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से स्थानीय निवासियों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए कोलकाता नगर निगम (KMC) से भी सुझाव मांगे गए हैं।

सभी ट्रैफिक गार्डों को अगले सप्ताह तक नए भीड़ खींचने वाले पंडालों के लिए ट्रैफिक सर्कुलेशन प्लान और वैकल्पिक पार्किंग स्थलों का प्रस्ताव देने को कहा गया है। इन प्रस्तावों की महीने के अंत तक समीक्षा की जाएगी।


चतुर्थी से अवैध पार्किंग पर 'चेज एंड चालान'

पुलिस ने साफ किया है कि पूजा के दौरान अवैध पार्किंग पर सख्ती की जाएगी, क्योंकि सड़क के किनारे बेतरतीब खड़े वाहन सड़क की उपलब्ध जगह कम कर यातायात जाम को बढ़ाते हैं। चतुर्थी से 'चेज एंड चालान' अभियान के तहत अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, पूजा घूमने आने वाले लोगों ने पार्किंग संकेतक बोर्ड और स्पष्ट दिशा-निर्देश बढ़ाने की मांग की है। पिछले वर्ष कई लोगों को आधिकारिक पार्किंग स्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई थी। इस बार पुलिस का प्रयास है कि वाहनों की पार्किंग, पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही और सड़क यातायात—तीनों को एक साथ व्यवस्थित किया जा सके।

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