जनगणना ड्यूटी से इनकार पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

कोलकाता नगर निगम ने शिक्षकों को जारी किया निर्देश
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीरsys160
Published on

राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : जनगणना कार्य में नियुक्त शिक्षकों को ड्यूटी से इनकार करने पर कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोलकाता नगर निगम ने बुधवार को प्राथमिक शिक्षा के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआई) को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य से इनकार करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में अधिकतम 1,000 रुपये का जुर्माना या तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षकों से सभी स्कूलों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया है। नगर निगम के इस निर्देश के बाद सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले ही उन्हें लगातार चुनाव संबंधी कार्यों में लगाया गया था और अब जनगणना की जिम्मेदारी मिलने से पढ़ाई प्रभावित होगी। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष नवंबर से मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान शिक्षकों ने करीब चार महीने तक चुनावी कार्य किया। इसके बाद विधानसभा चुनाव में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के रूप में घर-घर जाकर मतदाता पर्चियां वितरित कीं और मतदान के दिन भी विभिन्न बूथों पर ड्यूटी निभाई। अब उन्हें जनगणना कार्य में भी लगाया जा रहा है। शिक्षकों का आरोप है कि कई स्कूलों में आधे से अधिक शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर भेज दिया गया है। ऐसे में प्रधानाध्यापक स्कूल का संचालन कैसे करेंगे, यह बड़ी चुनौती बन गई है। अगस्त से स्कूलों में आवधिक परीक्षा का दूसरा चरण शुरू होना है, जबकि सितंबर में उच्च माध्यमिक के तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। इसी कारण कई प्रधानाध्यापकों ने शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से मुक्त रखने का अनुरोध भी किया था। इसी संदर्भ में नगर निगम के जनगणना विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि जनगणना कार्य से इनकार करना कानूनन अपराध है। जिन शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों को जनगणना कार्य के लिए नियुक्त किया गया है या आगे किया जाएगा, उन्हें तत्काल ड्यूटी जॉइन करनी होगी और अनिवार्य रूप से यह जिम्मेदारी निभानी होगी।

शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति

माध्यमिक शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी समिति के दक्षिण 24 परगना जिला सचिव अनिमेष हालदार ने कहा कि लंबे समय से नियुक्तियां नहीं होने के कारण सरकारी स्कूलों में पहले ही शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में लगभग सभी शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों को जनगणना ड्यूटी पर भेजने से स्कूलों में नियमित कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो जाएगा।

Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in