कोलकाता पुस्तक मेले से ‘गिल्ड’ का वर्चस्व खत्म

बदली व्यवस्था, 24 सदस्यीय नई कमेटी गठित
फ़ाइल फोटो
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कोलकाता : बंगाल के ‘चौदहवें पर्व’ के रूप में मशहूर कोलकाता पुस्तक मेले के आयोजन में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही मेले की आयोजन व्यवस्था में बदलाव की अटकलें लग रही थीं। 29 जून की बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई। आखिरकार अगस्त में राज्य सरकार ने 24 सदस्यीय सलाहकार कमेटी गठित कर दी। खास बात यह है कि पिछले कई वर्षों से पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड के अध्यक्ष रहे त्रिदिब चट्टोपाध्याय और महासचिव सुधांशु शेखर दे इस कमेटी में शामिल नहीं हैं।

अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला 2027 के आयोजन में पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड, ईजेडसीसी, नेशनल बुक ट्रस्ट समेत कई संस्थाएं शामिल होंगी। आयोजन से जुड़े विभिन्न विषयों पर नई कमेटी सलाह देगी।

कमेटी में स्वामी आर्येशानंद, स्वामी सारस्वतानंद, देवज्योति दत्त, अनिल आचार्य, मिलिंद दे, राजकुमार बर्मन, देवजीत सरकार, सप्तर्षि चौधरी, प्रसेनजीत बक्सी, विनायक बंद्योपाध्याय, सुकेश मंडल, मोहित राय, ओसमान गनी, आशीष गिरि, सप्तर्षि सिंह, ओफेलिया सिंह, अनिर्बान दे और अरिंदम भट्टाचार्य समेत 24 सदस्य हैं। राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन का एक प्रतिनिधि भी कमेटी में शामिल है।

राज्य भाजपा के प्रवक्ता देवजीत सरकार भी कमेटी में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वकील और ‘देशेर डाक’ के संपादक के रूप में कमेटी में शामिल हैं। 2027 का पुस्तक मेला पुस्तक मेले के 50 वर्ष, ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित होगा। आगामी बैठक ईजेडसीसी में होगी, गिल्ड के कार्यालय में नहीं।

गिल्ड के कथित एकाधिकार को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच सरकार के इस कदम को बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

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