एयरपोर्ट सुरक्षा जांच में महिला से जैकेट उतरवाने पर विवाद

लेखिका बनानी सिकदर ने उठाए सवाल
एयरपोर्ट सुरक्षा जांच में महिला से जैकेट उतरवाने पर विवाद
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता/पुणे : बनानी सिकदर ने हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के दौरान हुई एक घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि Kolkata और Pune के बीच लगातार यात्रा करते समय उन्हें अलग-अलग अनुभव होते हैं, लेकिन सुरक्षा जांच से जुड़े कुछ नियम हमेशा एक जैसे रहते हैं—जैसे हैंडबैग से नेल कटर, धातु की चेन निकालना और जैकेट, कोट या बेल्ट उतारना।

क्या है पूरा मामला?

लेखिका के अनुसार, हाल ही में एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान करीब 55–60 वर्ष की एक गरिमामयी महिला को अपनी हल्की जैकेट उतारने के लिए कहा गया। महिला ने सुरक्षा कर्मियों से निवेदन किया कि जैकेट ही उनका टॉप है और उसे उतारना उनके लिए असहज होगा।

उन्होंने अनुरोध किया कि यदि आवश्यक हो तो वे केबिन के अंदर जैकेट उतार सकती हैं, जहां महिला सुरक्षा कर्मी जांच कर लें। हालांकि, सुरक्षा अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए जैकेट को ट्रे में रखने पर जोर दिया।

सार्वजनिक रूप से उतारनी पड़ी जैकेट

प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, अंततः महिला को पुरुष यात्रियों की मौजूदगी में जैकेट उतारनी पड़ी। जांच पूरी होने के बाद महिला ने सुरक्षा अधिकारी से पूछा कि क्या मुस्लिम महिलाओं से भी बुर्का हटाने को कहा जाता है?

इस पर अधिकारी ने जवाब दिया कि उन्हें भी चेहरा दिखाना पड़ता है। महिला ने कहा कि उनका चेहरा पहले से खुला था और वे केवल अपना वक्ष ढंकना चाहती थीं। उन्होंने इसे असहज और अपमानजनक अनुभव बताया।

सुरक्षा बनाम संवेदनशीलता पर बहस

इस घटना के बाद सुरक्षा नियमों और व्यक्तिगत गरिमा के बीच संतुलन को लेकर बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा प्रक्रियाओं को लागू करते समय यात्रियों की उम्र, परिस्थिति और सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए?

लेखिका बनानी सिकदर ने विमान में बैठकर इस पूरे अनुभव को भावुक शब्दों में लिखा और कहा कि यह घटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक रही।

फिलहाल, एयरपोर्ट प्रशासन या सुरक्षा एजेंसी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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