

कोलकाता: कोलकाता के प्रमुख जलाशय रवींद्र सरोवर में जमा गाद को हटाने और उसकी गहराई बनाए रखने के लिए कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (KMDA) ने जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) के विशेषज्ञों से तकनीकी सहायता मांगी है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के हालिया निर्देश के बाद KMDA जलाशय के चुनिंदा हिस्सों में मशीनों के जरिए गाद निकालने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का जोर ऐसी तकनीक अपनाने पर है, जिससे झील की जैव विविधता और जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचे।
KMDA के एक अधिकारी के अनुसार, रवींद्र सरोवर के पांच से छह हिस्सों में काफी मात्रा में गाद जमा हो गई है। इन स्थानों की पहचान करने के बाद किसी एक हिस्से में प्रायोगिक परियोजना शुरू की जाएगी।
इसके लिए जादवपुर विश्वविद्यालय से ऐसी प्रक्रिया की रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है, जिससे गाद निकालने के दौरान पानी और जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव कम से कम पड़े।
अधिकारियों का मानना है कि लगभग 100 वर्ष पुराने इस कृत्रिम जलाशय के तल में वर्षों से गाद, तलछट और गैर-जैव अपघटनीय पदार्थ जमा होते रहे हैं। इससे झील की गहराई प्रभावित हुई है और नियमित सफाई की जरूरत बढ़ गई है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने KMDA को जलाशय में जलीय खरपतवार और जलकुंभी की अत्यधिक वृद्धि रोकने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर पब्लिक पूल और पद्मपुकुर क्षेत्र में इस समस्या पर ध्यान देने को कहा गया है।
इसके अलावा, पानी का स्तर घटने पर किनारों के खुले हिस्सों से हाथों द्वारा गाद हटाने और पूरे वर्ष तैरते कचरे की नियमित सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है। KMDA को झील के संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा करते हुए चुनिंदा स्थानों पर यांत्रिक ड्रेजिंग करने की अनुमति दी गई है।
जादवपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वाटर रिसोर्सेज इंजीनियरिंग के सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2005 से 2025 के बीच झील की औसत गहराई 3.6 मीटर से घटकर लगभग 3 मीटर रह गई। वहीं, दो मीटर से कम गहराई वाले हिस्सों का क्षेत्रफल कुल जलाशय के लगभग 18 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया।
रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों ने संवेदनशील गहरे हिस्सों को सुरक्षित रखते हुए उथले और अधिक गाद वाले क्षेत्रों में नियंत्रित ड्रेजिंग की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य रवींद्र सरोवर की पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हुए लंबे समय तक उसका संरक्षण करना है।