टाउन हॉल को रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित करेगा केएमसी

आईआईटी खड़गपुर को सौंपी गयी जिम्मेदारी
फाइल फोटो
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कोलकाता : ऐतिहासिक टाउन हॉल को कोलकाता और बंगाल में जन्मे विदुषियों पर शोध के लिए एक आधुनिक रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का कार्यभार आईआईटी खड़गपुर को सौंपा गया है। टाउन हॉल को म्यूजियम और रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने पहले एक समिति और उप-समिति का गठन किया था। समिति में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवियों को शामिल किया गया था। उनके समग्र सुझावों के आधार पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है। गुरुवार को कोलकाता नगर निगम मुख्यालय में आयोजित मासिक अधिवेशन के दौरान पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने सदन में इस संबंध में प्रस्ताव रखते हुए कहा कि औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1924 में देश का पहला नगर बोर्ड कोलकाता में ही गठित हुआ था। उस समय से लेकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए संघर्ष का संपूर्ण इतिहास, उससे जुड़े तथ्य और महत्वपूर्ण दस्तावेज आज भी नगर निगम के अभिलेखागार में सुरक्षित हैं। इन सभी दस्तावेजों को डिजिटल रूप में संरक्षित कर आर्काइव में संजोया गया है। उन्होंने कहा कि कोलकाता टाउन हॉल भी उसी ऐतिहासिक कालखंड का सजीव साक्षी है, जहां अनेक दुर्लभ पुस्तकें और चित्र संग्रहित हैं।

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देश-विदेश से बड़ी संख्या में शोधकर्ता, लेखक और छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए टाउन हॉल आते हैं। इन्हीं शोधकर्ताओं और पाठकों के अनुरोध के आधार पर यह प्रस्ताव रखा गया है कि नगर निगम के अभिलेखागार में डिजिटल रूप में सुरक्षित महत्वपूर्ण सूचनाओं की प्रतिलिपियां टाउन हॉल में भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि शोध कार्य को और अधिक सुगम बनाया जा सके। प्रस्ताव का समर्थन करते हुए एमएमआईसी देवाशीष कुमार ने बताया कि डीपीआर को विचारार्थ राज्य सचिवालय भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि टाउन हॉल में वर्तमान में 12,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है, जिनमें से कई पुस्तकें 1800 के दशक से भी अधिक पुरानी हैं। इनमें से अनेक पुस्तकों का डिजिटलीकरण पहले ही किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता के इतिहास और यहां जन्मे विदुषियों पर शोध करने के लिए लोग विभिन्न संस्थानों का दौरा करते हैं। आने वाले समय में टाउन हॉल को एक ऐसे प्रमुख शोध संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां आए बिना कोलकाता पर किया गया शोध अधूरा माना जाएगा।

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