

कोलकाता : पश्चिम मेदिनीपुर शहर के स्टेशन रोड स्थित कार्ल मार्क्स की प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को प्रतिमा पर लिखे कार्ल मार्क्स के नाम को काले कपड़े से ढका पाया गया। साथ ही प्रतिमा की हाथ की कुछ उंगलियां भी टूटी हुई मिलीं।
प्रतिमा के पास ‘हिंदू सुरक्षा समिति’ के नाम से एक बैनर लगाए जाने की भी बात सामने आई है। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, प्रतिमा के साथ यह घटना रविवार रात हुई। हालांकि, इसे किसने अंजाम दिया, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं।
सीपीएम के पश्चिम मेदिनीपुर जिला सचिव ने घटना को लेकर सत्तारूढ़ दल से जुड़े संगठन पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा के साथ इस तरह की कार्रवाई से वामपंथी विचारधारा और उनकी राजनीतिक गतिविधियों को रोका नहीं जा सकता।
वहीं, बीजेपी के जिला प्रवक्ता ने सीपीएम के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कार्ल मार्क्स विदेशी थे और पश्चिम बंगाल के लोग अब ऐसी प्रतिमाओं को स्वीकार नहीं करना चाहते। बीजेपी की ओर से घटना में पार्टी या उससे जुड़े किसी संगठन की भूमिका से इनकार किया गया है।
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मेदिनीपुर के स्टेशन रोड स्थित जलटंकी मोड़ पर कार्ल मार्क्स की यह पूर्णाकृति प्रतिमा स्थापित है। इसे 1983 में कार्ल मार्क्स की 175वीं जयंती के अवसर पर लगाया गया था। प्रतिमा के साथ हुई कथित तोड़फोड़ के बाद वाम दलों ने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।