केएलसी थाना के ओसी दीपंकर विश्वास के साथ कांस्टेबल महंत हाल्दार
केएलसी थाना के ओसी दीपंकर विश्वास के साथ कांस्टेबल महंत हाल्दार

जेल की सलाखों से पुलिस की वर्दी तक का सफर

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कांस्टेबल मोहंता हलदार की प्रेरणा से बदल रही है दर्जनों युवाओं की किस्मत

2026 की पुलिस भर्ती परीक्षा में मोहंता के 21 छात्रों का हुआ चयन

दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता :

किसी ने सच ही कहा है कि जिंदगी में आने वाली मुश्किलें इंसान को या तो पूरी तरह तोड़ देती हैं या फिर उसे पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बना देती हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता पुलिस के कांस्टेबल मोहंता हलदार (बैज नंबर 9484) की कहानी इसी जिद, संघर्ष और इंसानियत की एक ऐसी मिसाल है, जो यह साबित करती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है। वर्तमान में कोलकाता लेदर कॉम्प्लेक्स (KLC) पुलिस थाने में तैनात मोहंता आज न सिर्फ एक अनुशासित पुलिसकर्मी हैं, बल्कि सैकड़ों वंचित और जरूरतमंद युवाओं के लिए उम्मीद का एक नया सवेरा बन चुके हैं।

अंधेरे से उजाले तक का कठिन सफर

मोहंता हलदार को यह मुकाम इतनी आसानी से नहीं मिला। मूल रूप से दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर इलाके के रहने वाले मोहंता के जीवन में एक ऐसा दौर भी आया था जब उनका पूरा भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था। साल 2015 में एक आपराधिक मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और नौ दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा था। जेल के उन नौ दिनों ने उनकी सोच और जिंदगी की दिशा ही बदल दी। जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने समाज में अपनी स्थिति को सुधारने और कुछ सार्थक करने का संकल्प लिया और पूरी शिद्दत के साथ सरकारी नौकरियों की तैयारी में जुट गए।कड़ी मेहनत रंग लाई और साल 2017 में उन्होंने तीन-तीन सरकारी परीक्षाएं—करेक्शनल होम सर्विस, कोलकाता पुलिस कांस्टेबल और पश्चिम बंगाल पुलिस कांस्टेबल—एक साथ पास कर लीं। उन्होंने कोलकाता पुलिस को चुना, लेकिन उनकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान पुराने आपराधिक मामले के कारण उन्हें क्लियरेंस नहीं मिला और वे चयन होने के बावजूद नौकरी नहीं पा सके। इस लंबी और भारी अनिश्चितता के दौर में वे गहरे मानसिक तनाव से गुजरे, यहाँ तक कि उनके जीवन में ऐसा वक्त भी आया जब उन्होंने दो बार आत्महत्या करने की कोशिश तक कर डाली।

एक फरिश्ता बना उम्मीद की किरण

निराशा के उस भंवर में जब चारों तरफ से रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब उनकी मुलाकात बारुईरपुर पुलिस जिले के तत्कालीन एसपी, आईपीएस अधिकारी अरिजीत सिन्हा से हुई। मोहंता ने उनके सामने रोते हुए अपनी सारी परिस्थिति रखी। उस दयालु आईपीएस अधिकारी के हस्तक्षेप से मामले ने तेजी से कानूनी रुख लिया और महज तीन महीने के भीतर अदालत ने उन्हें बेकसूर पाते हुए बरी कर दिया। इसके बाद साल 2018 में आखिरकार उनका कोलकाता पुलिस में कांस्टेबल के रूप में शामिल होने का सपना सच हो गया।

खुद की ठोकरों से दूसरों को दिया सहारा

अपने जीवन के इस संघर्षपूर्ण दौर से सीख लेते हुए कांस्टेबल मोहंता हलदार ने तय किया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा युवाओं को अपनी तरह अकेलेपन और लाचारी का शिकार नहीं होने देंगे। उन्होंने उन छात्रों को पूरी तरह मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन देना शुरू किया जो महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस देने में असमर्थ थे। साल 2026 में उनकी इस नेक मुहिम को एक और ऐतिहासिक सफलता मिली। इस वर्ष उनके द्वारा पढ़ाए गए 23 उम्मीदवारों में से 21 ने पश्चिम बंगाल पुलिस की भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की और कांस्टेबल के पद पर चयनित हुए। इन युवाओं को इंटरव्यू के आखिरी चरण के लिए तैयार करने के वास्ते कोलकाता लेदर कॉम्प्लेक्स थाने के प्रभारी दीपांकर विश्वास और अन्य अधिकारियों के मार्गदर्शन में थाने के अंदर ही विशेष मुफ्त मॉक इंटरव्यू सत्र आयोजित किए गए। इसके पीछे का उद्देश्य यह था कि ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि के ये युवा पुलिस थाने के वास्तविक माहौल से रूबरू हो सकें और उनका आत्मविश्वास मजबूत हो सके।

समाज सेवा की मिसाल

आज मोहंता हलदार अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने मार्गदर्शक आईपीएस अधिकारी अरिजीत सिन्हा को देते हैं, जिन्हें वे भगवान का दर्जा देते हैं। उनके लिए उनके छात्रों की यह सफलता महज कुछ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि उनके खुद के संघर्षों की एक खूबसूरत प्रतिध्वनि है। जेल की सलाखों से लेकर पुलिस की वर्दी पहनने और अब दूसरों के जीवन को संवारने तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि इंसान अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से अपनी तकदीर खुद लिख सकता है।
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