

कोलकाता : जामुन खाते समय गले में फंसी गुठली एक बुजुर्ग महिला के लिए जानलेवा स्थिति बन गई। अंडमान-निकोबार की रहने वाली 70 साल से अधिक उम्र की दृष्टिबाधित महिला की सांस की नली में जामुन की गुठली फंस गई थी।
स्थानीय स्तर पर दो बार उसे निकालने की कोशिश नाकाम रहने के बाद महिला को इलाज के लिए कोलकाता लाया गया। यहां डॉक्टरों ने जटिल ब्रोंकोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिए गुठली को निकालकर उसकी जान बचाई।
सांस की नली में फंस गई थी गुठली, दो जगह प्रयास रहे नाकाम जानकारी के मुताबिक, जामुन खाते समय महिला अचानक गुठली निगल गई और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिवार के लोग उसे तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां ऑक्सीजन, नेबुलाइजेशन और अन्य जरूरी उपचार देकर उसकी हालत को स्थिर किया गया।
इसके बाद बड़े चिकित्सा केंद्र में कराए गए एक्स-रे से पता चला कि जामुन की गुठली सांस की नली से होते हुए बाएं मुख्य ब्रोंकस में जाकर फंस गई है। इससे एयरवे में गंभीर रुकावट पैदा हो गई थी। परिवार के मुताबिक, दो अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों में जटिल ब्रोंकोस्कोपिक के जरिए गुठली निकालने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों प्रयास सफल नहीं हुए।
इसके बाद महिला को बेहतर इलाज के लिए कोलकाता लाया गया। 90 मिनट की जटिल प्रक्रिया में निकाली गुठली कोलकाता के एचपी घोष अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अंशुमान मुखोपाध्याय के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने महिला का इलाज किया। टीम में डॉ. संघब्रत सूर, डॉ. ऋतम चक्रवर्ती, डॉ. प्रज्ज्वल सरकार और डॉ. अनिर्बान भट्टाचार्य शामिल थे।
डॉक्टरों ने करीब 90 मिनट तक चली जटिल ब्रोंकोस्कोपिक प्रक्रिया में विशेष उपकरणों की मदद से गुठली को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा। गुठली इतनी मजबूती से फंसी थी कि उसे एक साथ निकालना संभव नहीं था। डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक उसके सभी टुकड़ों को बाहर निकाला। इस दौरान ब्रोंकोस्कोपी और एनेस्थीसिया टीम के बीच बेहतर समन्वय रखा गया।
सभी टुकड़े निकलने के बाद महिला को वेंटिलेटर से हटाया गया और उसने खुद सांस लेना शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने उसे दो दिनों तक निगरानी में रखा। हालत में सुधार के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह हाल ही में अपने घर लौट गई।