

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा तृणमूल कांग्रेस के भीतर संभावित टूट को लेकर हो रही है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को लेकर अटकलें हैं कि वे बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन के साथ बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष एक पत्र सौंप सकते हैं, जिसके बाद “नयी तृणमूल” के गठन का दावा किया जा सकता है।
सूत्रों का दावा है कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस के 53-54 विधायकों का समर्थन भी मिल चुका है। बताया जा रहा है कि पत्र सौंपे जाने के समय कथित रूप से उनके समर्थन में खड़े सभी विधायक विधानसभा में मौजूद रह सकते हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले सोमवार को देर रात कई तृणमूल विधायक रूबी के पास स्थित विधायक हॉस्टल में ऋतब्रत और संदीपन के साथ बैठक करते हुए देखे गए थे। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को और हवा दे दी है, हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
यही नहीं, मंगलवार को विधानसभा से निकलते समय ऋतब्रत ने कहा कि वह बुधवार को विधानसभा में आयोजित प्रशासनिक बैठक में निश्चित रूप से शामिल होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके जिले के कई विधायक भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे। हालांकि, उन्होंने किसी बागी गुट या नये दल के गठन की पुष्टि नहीं की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच दल-बदल विरोधी कानून की चर्चा भी तेज हो गई है।
क्या कहता है नियम?
नियमों के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक एक साथ अलग होकर किसी अन्य दल में शामिल होते हैं या स्वयं को अलग समूह घोषित करते हैं, तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता। तृणमूल के मामले में यह संख्या लगभग 53-54 विधायकों की मानी जा रही है। यदि इतनी संख्या में विधायक किसी नये राजनीतिक समूह या “असली तृणमूल” होने का दावा करते हैं, तो उनकी मांग पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, ऐसे किसी भी दावे की वैधता पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष को लेना होगा। उनके निर्णय को अदालत में चुनौती भी दी जा सकती है। अब राजनीतिक जानकारों की निगाहें आज यानी बुधवार को ऋतब्रत के द्वारा उठाये जाने वाले कदमों पर टिकी हैं, जहां विधानसभा में होने वाली गतिविधियां बंगाल की राजनीति का नया अध्याय लिख सकती हैं।