

कोलकाता : फिल्म उद्योग को बचाने के लिए निवेश बढ़ाना होगा। अच्छी पटकथा और दमदार चरित्रों वाली फिल्में कम बन रही हैं। इसलिए दर्शक सिनेमामुखी कम हो रहे है। ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (इम्पा) हाउस में स्क्रिनिंग कमेटी की बैठक में फेडरेशन के अध्यक्ष स्वरूप विश्वास ने यह बात कही। बैठक में कई शीर्ष निर्माता और इम्पा अध्यक्ष पिया सेनगुप्ता मौजूद थे। आगे स्वरूप ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ कोलकाता केंद्रित फिल्में बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उपनगरों और छोटे शहरों के लिए भी फिल्में बनानी होंगी। उपनगरों के सिनेमा हॉल बचेंगे, तभी उद्योग बढ़ेगा। बैठक में 2026 के आधिकारिक रिलीज कैलेंडर पर भी चर्चा हुई। एक ही दिन कई बड़ी फिल्मों की रिलीज और शो शेयरिंग की समस्या रोकने के लिए इम्पा और फेडरेशन ने मिलकर कई फैसले लिए। साल में 11 प्राइम रिलीज विंडो तय की गईं। बैठक में शामिल एक निर्माता ने बताया कि उद्योग को एक स्पष्ट स्टैंड लेना होगा। बंगाली फिल्मों में निवेश बढ़ेगा तो फिल्में बढ़ेंगी, रोजगार बढ़ेगा और दर्शक फिर से सिनेमाघरों की ओर रुख करेंगे। उनके अनुसार जब भी अच्छी मनोरंजक फिल्म बनती है, बिना किसी बड़े सितारे के भी दर्शकों से हॉल भर जाता है। इम्पा अध्यक्ष पिया सेनगुप्ता ने कहा कि प्राइम विंडो पाने के लिए कम से कम 2 करोड़ बजट की फिल्म बनानी होगी और यह संयुक्त प्रोडक्शन पर लागू नहीं होगा। किसी भी प्राइम विंडो में 3 से अधिक फिल्में रिलीज नहीं की जाएंगी और हर फिल्म को कम से कम दो सप्ताह का बिजनेस समय मिलेगा।