इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल (IPAF) कोलकाता में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव

इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल (IPAF) कोलकाता में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : प्रतिष्ठित सत्यजीत रे ऑडिटोरियम, कोलकाता में आयोजित इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल (IPAF) कोलकाता 2026 का भव्य समापन शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच और भारतीय संस्कृति की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के साथ हुआ। इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथि, प्रतिष्ठित कलाकार, सांस्कृतिक प्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि तथा कला-रसिक उपस्थित रहे। इस आयोजन ने भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति IPAF की प्रतिबद्धता को एक बार फिर सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह से हुई, जो ज्ञान, शांति और समृद्धि का प्रतीक है। इसके बाद मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों और भाग लेने वाले कलाकारों का सम्मान किया गया। समारोह में भारतीय कला परंपराओं के संरक्षण में कलाकारों के अमूल्य योगदान की सराहना की गई।

दर्शकों का स्वागत करते हुए IPAF के संस्थापक श्री श्याम पांडेय ने सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने और कलाकारों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई 2015 को अहमदाबाद से शुरू हुई IPAF की यात्रा के दौरान अब तक देशभर में 250 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया जा चुका है। संस्था पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण, दिव्यांग कलाकारों को प्रोत्साहन, युवा प्रतिभाओं के विकास तथा कश्मीर से कन्याकुमारी और इम्फाल से अहमदाबाद तक राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित तथा वाराणसी घराने की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथक कलाकार नलिनी एवं कमलिनी की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। उनकी आध्यात्मिक प्रस्तुति "महादेव स्तुति" तथा लयबद्ध "पदसंजोजन" ने अपने भावपूर्ण अभिनय, आकर्षक मुद्राओं और उत्कृष्ट पाद संचालन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति को लंबे समय तक खड़े होकर तालियों के साथ सराहा गया।

दूसरी प्रस्तुति के रूप में कलामंडलम कोलकाता द्वारा नृत्य-नाट्य "पुरुषोत्तम श्रीराम" प्रस्तुत किया गया। इसकी संकल्पना और निर्देशन सौमित कुट्टी ने किया, जबकि नृत्य संयोजन कलामंडलम स्वर्णदीपा का था। रामायण के अपेक्षाकृत कम चर्चित प्रसंगों पर आधारित इस प्रस्तुति में धर्म, करुणा, त्याग और मानवता जैसे शाश्वत मूल्यों को शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच, संगीत और कथावाचन के सुंदर समन्वय के माध्यम से जीवंत किया गया।

इसके बाद प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका एवं आकाशवाणी की टॉप ग्रेड ठुमरी कलाकार विदुषी आइवी बनर्जी ने अपनी भावपूर्ण गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने ठुमरी, दादरा, कजरी, झूला तथा भक्तिमय रचनाओं की प्रस्तुति देकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और गहराई का शानदार परिचय कराया। उनकी प्रस्तुति को भी दर्शकों ने भरपूर सराहा।

कार्यक्रम का समापन प्रसिद्ध कलाकार सोमाभा बंद्योपाध्याय की मनोहारी मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति के साथ हुआ। उनकी सौम्य नृत्य मुद्राओं और भक्तिभाव से परिपूर्ण अभिव्यक्ति ने मणिपुर की आध्यात्मिक और सौंदर्यपरक सांस्कृतिक परंपराओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए पूरे समारोह को यादगार बना दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए आयोजकों ने कहा कि IPAF विभिन्न राज्यों के कलाकारों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य कर रहा है। साथ ही संस्था भविष्य में वैश्विक स्तर पर विस्तार करते हुए भारतीय प्रदर्शन कलाओं को विश्वभर के दर्शकों तक पहुंचाने के अपने लक्ष्य पर भी निरंतर कार्यरत है।

आयोजकों ने सभी कलाकारों, गणमान्य अतिथियों, प्रायोजकों, मीडिया सहयोगियों, स्वयंसेवकों और दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग और उत्साहवर्धन से IPAF कोलकाता 2026 अत्यंत सफल रहा। उनका सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के मिशन को और अधिक मजबूत करता रहेगा।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ। दर्शकों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का अभिनंदन किया और इसी के साथ इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल की सफल यात्रा का एक और स्वर्णिम अध्याय संपन्न हुआ।

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