वसीयत के महत्व पर इंटरैक्टिव सत्र आयोजित, प्रोफेशनल्स ने दिखाई विशेष रुचि

“वसीयत के जरिए मिलने वाली संपत्ति पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता” - नारायण जैन
Kolkata
वसीयत के महत्व पर इंटरैक्टिव सत्र
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कोलकाता : सोमवार शाम को 'डायरेक्ट टैक्सेज प्रोफेशनल्स एसोसिएशन स्टडी सर्कल द्वारा 'वसीयत के महत्व और उपयोगिता' पर एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में पैनलिस्ट के रूप में 'खैतान एंड कंपनी सॉलिसिटर्स' के सीनियर पार्टनर एडवोकेट एन.जी. खैतान, आदित्य बिड़ला ग्रुप के सीए आर.पी. पंसारी, एडवोकेट और लेखक नारायण जैन, तथा एडवोकेट आर.डी. काकरा शामिल थे।

चर्चा की शुरुआत करते हुए, एडवोकेट नारायण जैन ने एक वैध वसीयत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वसीयत किसी कागज पर बनाई जा सकती है। वसीयत बनाने वाले व्यक्ति (टेस्टेटर) को दो गवाहों की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर करने होते हैं।

साथ ही, वसीयत के क्रियान्वयन के लिए एक 'एग्जीक्यूटर' (निष्पादक) नियुक्त करना भी उचित है। वसीयत के जरिए मिलने वाली संपत्ति को 'आय' नहीं माना जाता है, इसलिए ऐसी संपत्ति पर कोई आयकर (इनकम टैक्स) नहीं देना पड़ता। भारत में, कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार अपनी संपत्ति किसी रिश्तेदार, गैर-रिश्तेदार या किसी धर्मार्थ कार्य (चैरिटी) के लिए दे सकता है।

एडवोकेट एन.जी. खैतान ने यू.के. और चीन में वसीयत से जुड़े नियमों के बारे में जानकारी दी। सीए आर.पी. पंसारी ने वसीयत बनाते समय बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों के बारे में बताया। एडवोकेट आर.डी. काकरा ने वसीयत की 'प्रोबेट' (कानूनी मान्यता) प्राप्त करने की प्रक्रिया पर चर्चा की।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई वसीयत न हो, तो 'सक्सेशन सर्टिफिकेट' (उत्तराधिकार प्रमाण पत्र) कैसे प्राप्त किया जा सकता है। स्टडी सर्कल की कन्वीनर सीए मंजू लता शुक्ला ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि सीए महेंद्र अग्रवाल ने सभी का स्वागत किया। स्टडी सर्कल के डिप्टी कन्वीनर सीए श्याम अग्रवाल ने पैनलिस्टों और कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।

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