नवपद ओली आराधना में जैन संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा

श्री वर्धमान जैन संघ में मुनि रविन्द्र विजय एवं मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में चल रही साधना
Kolkata
जैन संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा
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कोलकाता : श्री वर्धमान जैन संघ में मुनि रविन्द्र विजय महाराज एवं मुनि महेन्द्र विजय महाराज के सानिध्य में नवपद ओली आराधना के तहत श्रद्धालु साधना, पूजा और तप में लीन हैं। 26 अक्टूबर तक चली इस आराधना के दौरान नौ पदों की विशेष पूजा-अर्चना में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भाग लिया।

मुनि रविन्द्र विजय महाराज ने नवपद ओली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जैन धर्म का शाश्वत पर्व है। नौ दिनों तक चलने वाली इस आराधना में जैन धर्म के नौ पदों की पूजा की जाती है। प्रत्येक पद व्यक्ति को जीवन में जैन धर्म के संस्कार, संयम और सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने बताया कि नवपद ओली की आराधना वर्ष में दो बार, चैत्र और आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में की जाती है। इस दौरान पंचपरमेष्ठी सहित नौ पदों की पूजा, जप और आयंबिल तप का विशेष महत्व है। आयंबिल तप में श्रद्धालु खानपान पर संयम रखते हुए निर्धारित नियमों के अनुसार दिन में एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

इस धार्मिक आयोजन में श्री वर्धमान जैन संघ के ट्रस्टी कमल सिंह रामपुरिया, विजय चन्द बैद, रतनचंद बांगानी, एस. मिलाप चन्द, मुल्तान चन्द सुराणा, महेन्द्र सुराणा, दिलीप दुगड़, विनीत रामपुरिया और नरेन्द्र बांठिया सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

चातुर्मास प्रबंध समिति के संयोजक माणकचन्द सेठिया, शांतिलाल रामपुरिया, मोहनलाल कोचर, देवेन्द्र कोचर एवं अन्य कार्यकर्ता भी सहयोग कर रहे हैं।

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