भारत-चीन व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग को मिलेगा नया विस्तार : महावाणिज्यदूत शू वेई

महावाणिज्यदूत शू वेई
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : 7वें चीन-दक्षिण एशिया सहयोग मंच-2026 में भारत की सहभागिता, चीन-दक्षिण एशिया थिंक टैंक फोरम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका तथा पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल की चीन यात्रा के अनुभवों को साझा करने के लिए कोलकाता में आयोजित प्रेस संवाद में भारत-चीन संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर कोलकाता स्थित चीन के महावाणिज्यदूत शू वेई ने कहा कि भारत-चीन संबंधों का भविष्य बेहद सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में द्विपक्षीय संबंध लगातार प्रगति कर रहे हैं और व्यापार के साथ-साथ जन-से-जन संपर्क तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि विश्व की उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं। यदि दोनों देश मिलकर आगे बढ़ें, तो "एशियाई सदी" के सपने को साकार किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

कार्यक्रम में सामाजिक उद्यमी एवं सतत विकास की समर्थक डॉ. चैताली दास ने 7वें चीन-दक्षिण एशिया सहयोग मंच-2026 के अंतर्गत आयोजित चीन-दक्षिण एशिया थिंक टैंक फोरम में भारत का प्रतिनिधित्व करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण, पर्यावरण-अनुकूल विकास, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पुनर्जीवन और जन-से-जन संपर्क को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कैंसर पर विजय प्राप्त कर चुकीं डॉ. चैताली दास ने भारत और चीन के बीच स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से "चीन-दक्षिण एशिया ऑन्कोलॉजी एक्सचेंज कार्यक्रम" शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि इस पहल से दोनों देशों के स्वास्थ्य संस्थानों, शोधकर्ताओं और कैंसर विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ेगा तथा रोगियों की देखभाल और चिकित्सा अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।

प्रेस संवाद में पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल की चीन यात्रा की भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया तथा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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