

पिछले तीन सालों के डेटा की हो रही है जांच
हजारों करोड़ की प्रॉपर्टी रजिस्ट्री से अंजान रहा आयकर विभाग
कई जिलों में बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन का खुलासा
नेहा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले तीन वर्षों में हुए हजारों करोड़ रुपये के प्रॉपर्टी लेन-देन से आयकर विभाग पूरी तरह बेखबर था। विभाग ने इन मामलों की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में ऐसा संदेह है कि कई ट्रांजैक्शनों में खरीदारों और विक्रेताओं की पैन डिटेल या टैक्स फाइलिंग की जानकारी दर्ज नहीं थी। संपत्ति खरीद-बिक्री में पारदर्शिता की कमी और सूचना छिपाने की प्रवृत्ति एक बार फिर उजागर हुई है। विभिन्न जिलों में पिछले तीन वर्षों में हुए हजारों करोड़ रुपये के प्रॉपर्टी लेन-देन ने आयकर विभाग को चौंका दिया है। विभाग को इन लेन-देन की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी, और अब इन मामलों की गंभीरता से जांच शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह मामला कर चोरी से जुड़ा हो सकता है, और इसमें कई बड़े और नामचीन लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
कई लेन-देन पर है नजर
आंकड़ों के अनुसार, राजारहाट सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में करीब ₹81,590 करोड़ की रजिस्ट्री सामने आई है, जिसकी विभाग को कोई सूचना नहीं थी। इसके अलावा, हावड़ा में ₹10,492 करोड़, चाकदह (नदिया) में ₹431 करोड़, तारकेश्वर एडीएसआर से इस वित्तीय वर्ष में ₹50 करोड़, बालीचक एडीएसआर से ₹325 करोड़, और जनाई (हुगली) में ₹2,746 करोड़ की रजिस्ट्री की रिपोर्ट सामने आई है। आयकर विभाग ने इन सभी मामलों की पिछले तीन वर्षों के रजिस्ट्रेशन डेटा के आधार पर गहन जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में संदेह जताया गया है कि कई लेन-देन में खरीदारों और विक्रेताओं की पैन डिटेल्स या टैक्स फाइलिंग की जानकारी दर्ज नहीं की गई थी, जो कर चोरी का संकेत हो सकता है। आयकर सूत्रों के मुताबिक इन रजिस्ट्री लेन-देन में टैक्स नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हम रजिस्ट्रेशन डेटा, पैन विवरण और टैक्स फाइलिंग की पूरी जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन लेन-देन में जानबूझकर कर चोरी की गई।
संभावित कर चोरी और बेनामी संपत्ति की आशंका
विभाग को आशंका है कि इनमें से कई लेन-देन बेनामी संपत्ति या अघोषित आय से संबंधित हो सकते हैं। न्यू टाउन-राजारहाट क्षेत्र, जो रियल एस्टेट का एक प्रमुख केंद्र है, में बड़े पैमाने पर डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स की भी जांच की जा रही है। इस बारे में राजारहाट सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ने रिकंसाइल करने को आयकर को आश्वासन दिया है। सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग इन मामलों में अन्य एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर सकता है ताकि वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से पड़ताल की जा सके।
संभावित परिणाम
यदि जांच में कर चोरी या नियमों का उल्लंघन सिद्ध होता है, तो आयकर अधिनियम, 1961 के तहत दोषियों पर 30 % तक का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा, बेनामी संपत्ति से संबंधित मामलों में बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम के तहत सजा और संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी संभव है। आयकर विभाग ने सभी संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से रजिस्ट्रेशन डेटा मांगा है और पैन कार्ड, टैक्स फाइलिंग और बैंक लेन-देन की जानकारी का मिलान कर रहा है।
यह है नियम
आयकर कानूनों के अनुसार, किसी भी 30 लाख रुपये से अधिक के संपत्ति लेनदेन की जानकारी विभाग को देना अनिवार्य है। इसके बावजूद इन लेनदेन की सूचना अब तक साझा नहीं की गई थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, फिलहाल सिर्फ वर्तमान वित्तीय वर्ष के आंकड़े ही सामने आए हैं। यदि बीते तीन वर्षों के आंकड़े शामिल किए जाएं, तो अनुमान है कि कुल ट्रांजैक्शन हजारों करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुके हैं। इस खुलासे से यह भी संकेत मिलता है कि इन क्षेत्रों में रियल एस्टेट बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और संपत्ति की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। यह बात स्थानीय स्तर पर रियल एस्टेट में निवेश की ओर बढ़ते रुझान को दिखाती है।
आंकड़ों के अनुसार :
राजारहाट सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में करीब ₹81,590 करोड़ की रजिस्ट्री सामने आई है
हावड़ा में ₹10,492 करोड़ ।
चाकदह (नदिया) में ₹431 करोड़,
तारकेश्वर एडीएसआर में ₹50 करोड़,
बालीचक एडीएसआर में ₹325 करोड़,
जनाई (हुगली) में ₹2,746 करोड़ की रजिस्ट्री रिपोर्ट सामने आई है।