प. बंगाल में एसआईआर के तहत गणना के दौरान हिंसा और बाधा उत्पन्न करने की घटनाएं हुईं : ईसी

सांकेतिक तस्वीर
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सन्मार्ग संवाददाता

नयी दिल्ली : निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत गणना के दौरान चुनाव अधिकारियों के खिलाफ हिंसा, धमकी और व्यवधान उत्पन्न करने की कई घटनाएं सामने आईं।

निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में दावा किया कि ये घटनाएं अन्य राज्यों में गणना चरण के विपरीत थीं, जो ‘‘सुचारू रूप से और बिना किसी घटना के’’ संपन्न हुआ था।

इसने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 2025 की मतदाता सूचियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसकी एसआईआर के दौरान 58 लाख से अधिक अनुपस्थित, मृत और स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं की पहचान की गई थी और चुनावी पंजीकरण अधिकारियों द्वारा लगभग 1.51 करोड़ नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

हलफनामे के अनुसार, स्थानीय पुलिस अधिकारियों में बीएलओ द्वारा की गई शिकायतों पर मामले दर्ज करने के प्रति ‘‘व्यापक अनिच्छा’’ थी और कुछ प्राथमिकी जिला निर्वाचन अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही दर्ज की गई थीं।

इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने प्राथमिकी दर्ज करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के संबंध में निर्वाचन आयोग के निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया।

पिछले साल 24 नवंबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कोलकाता कार्यालय के घेराव के संबंध में हलफनामे में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने जबरन प्रवेश करने का प्रयास किया, पुलिस बैरिकेड तोड़े, कार्यालय में तोड़फोड़ की, अधिकारियों के काम में बाधा डाली, परिसर को बंद कर दिया और अधिकारियों को अंदर-बाहर आने-जाने से रोका, जिससे आधिकारिक कामकाज गंभीर रूप से बाधित हुआ।

इसमें कहा गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा सुरक्षा उल्लंघन के संबंध में कोलकाता के पुलिस आयुक्त को लिखे गए पत्र के बावजूद, प्रदर्शनकारी लगभग 28 घंटे तक परिसर में डेरा डाले रहे, और न तो कोई मामला दर्ज किया गया और न ही कोई गिरफ्तारी की गई।

हलफनामे में इस बात पर जोर दिया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा किए गए खतरे के आकलन के बाद, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी और वह इस तरह की सुरक्षा प्राप्त करने वाले एकमात्र निर्वाचन अधिकारी थे।

हलफनामे के अनुसार, बीएलओ ने परिस्थितियों के बावजूद, गणना के दौरान कुल का 92.40 प्रतिशत यानी 7.08 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र एकत्र किए।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने यह देखते हुए कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इससे किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए, निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि ‘‘तार्किक विसंगतियों’’ की सूची में शामिल लोगों के नाम ग्राम पंचायत भवनों और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं, जहां दस्तावेज और आपत्तियां भी जमा की जाएंगी।

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