

कोलकाता : देश में शोध और वैज्ञानिक सोच को मजबूत करने के लिए विज्ञान, तकनीक तथा सामाजिक विज्ञान के अनुसंधान पर जीडीपी का कम-से-कम 3 फीसदी निवेश किया जाये। शुक्रवार को ‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ के तहत महानगर में निकाले गये मार्च में यह मांग प्रमुखता से उठी। आयोजकों का कहना है कि वैज्ञानिक अनुसंधान में पर्याप्त सार्वजनिक निवेश के बिना देश की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था और सामाजिक प्रगति को गति देना मुश्किल है।
राजाबाजार साइंस कॉलेज से कॉलेज स्क्वायर तक निकले मार्च में वैज्ञानिकों, शिक्षकों, छात्रों और विज्ञान समर्थक नागरिकों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने संविधान के अनुच्छेद 51ए(एच) का हवाला देते हुए अंधविश्वास और कुसंस्कार के प्रसार पर रोक लगाने तथा तर्कसंगत सोच को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
आयोजकों ने जलवायु संकट और पर्यावरणीय क्षरण से निपटने के लिए प्रमाण-आधारित नीतियां अपनाने की मांग की। शिक्षा पाठ्यक्रम में अवैज्ञानिक और अतार्किक विषयों को शामिल करने का विरोध करते हुए शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने की मांग भी उठी। केंद्र के बजट का 10 फीसदी और राज्य के बजट का 30 फीसदी शिक्षा क्षेत्र में खर्च करने की मांग की गयी।
इसके अलावा एनटीए को समाप्त कर सरकारी परीक्षाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा अंधविश्वास और शोषणकारी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए काला जादू विरोधी कानून बनाने की मांग भी की गयी।