अमेरिका में ठगी, कंट्रोल रूम महेशतला में

कोलकाता पुलिस ने अवैध कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, 8 गिरफ्तार
फाइल फोटो
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कोलकाता : महेशतला के नामी आवासन में बैठकर अमरीकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का कोलकाता पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम थाना के अधिकारियों ने मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग अवैध कॉल सेंटर की आड़ में ठगी का कारोबार कर रहे थे। अभियुक्तों के नाम जुनैद अली, मो. शकीर (24), मो.खुर्शीद अख्तर, शदाब खान (31), कुंदन राय (24), मो. हुसैन अहमद खान, जाकीर खान और शेख अमीरुल्ला हैं। अभियुक्तों के पास से 5 लैपटॉप और 12 मोबाइल फोन बरामद किये गये हैं। पुलिस के अनुसार महेशतला थानांतर्गत जोट शिबरामपुर इलाके में स्थित नामी आवासन के फ्लैट में कॉल सेंटर ऑपरेट किया जा रहा था।

कैसे काम करता था गिरोह

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह माइक्रोसॉफ्ट के नाम पर फर्जी तरीके से ग्राहकों को ठग रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपित खुद को माइक्रोसॉफ्ट का अधिकृत कस्टमर सपोर्ट और टेक्निकल सपोर्ट प्रतिनिधि बताकर काम कर रहे थे। उन्होंने अमेरिका में विभिन्न वेब प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया चैनलों पर चुनिंदा संपर्क नंबर प्रसारित किए, जिन्हें माइक्रोसॉफ्ट के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर के रूप में प्रचारित किया गया।

जब अमेरिकी नागरिक इन नंबरों पर संपर्क करते थे, तो आरोपित माइक्रोसॉफ्ट टीम्स के माध्यम से उनसे जुड़ते और तकनीकी सहायता या माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट से जुड़े रिफंड दिलाने के बहाने विश्वास में लेते थे। इसके बाद पीड़ितों को टीमव्यूअर, अल्ट्राव्यूअर और एनीडेस्क जैसे रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित किया जाता था, जिससे आरोपितों को पीड़ितों के कंप्यूटर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच मिल जाती थी।

इस अनधिकृत पहुंच का दुरुपयोग कर आरोपित पीड़ितों के बैंक ऑफ अमेरिका, वेल्स फार्गो, टीडी बैंक और नेवी फेडरल क्रेडिट यूनियन सहित विभिन्न बैंकों में मौजूद इंटरनेट बैंकिंग खातों तक पहुंच बनाते थे। इसके बाद खातों से धनराशि निकालकर विदेशी बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर की जाती थी या फिर उसे एप्पल गिफ्ट कार्ड में परिवर्तित कर लिया जाता था, जिन पर इस गिरोह का नियंत्रण था।

अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए आरोपित टर्बो वीपीएन सहित अत्याधुनिक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे। साथ ही, पीड़ितों को भ्रमित करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट तथा अमेरिका की विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के नाम से फर्जी और जाली इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज भी भेजे जाते थे। पुलिस के अनुसार, यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह है और मामले की जांच जारी है। अन्य आरोपितों की भूमिका और धन के लेन-देन की कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।

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