पुलिस ही डर की वजह हो तो रक्षा कौन करेगा : अभिषेक

बिरजू केवट की हिरासत में मौत पर उठाये सवाल
अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी
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कोलकाता : कांचरापाड़ा में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता बिरजू केवट की पुलिस हिरासत में मौत को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाये हैं। उन्होंने दावा किया कि बिरजू का नाम एफआईआर में नहीं था, इसके बावजूद उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में उनकी मौत हो गयी।

अभिषेक ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि बिरजू के परिवार ने पुलिस की ओर से बर्बर मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल किया, “पुलिस ही अगर डर का कारण बन जाए तो नागरिकों की रक्षा कौन करेगा?” अभिषेक के मुताबिक, एफआईआर में नाम नहीं होने के बावजूद किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाना और फिर उसका जीवित वापस नहीं आना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि कानून के शासन पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

बिरजू केवट को पुलिस ने वसूली और भ्रष्टाचार समेत कई आरोपों में गिरफ्तार किया था। उन्हें बैरकपुर महकमा अदालत में पेश किये जाने के बाद पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद उन्हें हालीशहर थाने के लॉकअप में रखा गया।

परिवार का आरोप है कि हिरासत के दौरान बिरजू के साथ मारपीट की गयी। उनकी पत्नी ने दावा किया कि उन्हें रस्सी से बांधकर पीटा गया और उनके शरीर पर चोट के निशान थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस के अनुसार, लॉकअप में बिरजू की तबीयत अचानक बिगड़ गयी। इसके बाद उन्हें कल्याणी के जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की आशंका जतायी है। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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